करणी माता मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के बीकानेर के देशनोक कस्बे में स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है। यह मंदिर अपने अद्भुत धार्मिक महत्व, विशिष्ट परंपराओं और अनूठे अनुभवों के कारण राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। यह मंदिर देवी करणी माता को समर्पित है और यहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं। इस मंदिर को “चूहों वाला मंदिर” के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यहाँ बड़े संख्या में चूहे रहते हैं। इन चूहों को ‘काबा’ कहा जाता है और वे देवी के परिवार के सदस्य माने जाते हैं।
करणी माता मंदिर देशनोक
करणी माता मंदिर राजस्थान के बीकानेर जिले के देशनोक कस्बे में स्थित है, जो बीकानेर शहर से लगभग 30 किमी दक्षिण में है। यह मंदिर हिन्दुओं के बीच अत्यंत प्रचलित है। राजपूतों और चारण जाति के लोगों के लिए तो यह एक प्रमुख तीर्थस्थल है।
यहाँ असंख्य चूहे (काबा) निर्बाध रूप से मंदिर परिसर में घूमते हैं और इन्हें देवी का आशीर्वाद माना जाता है। इन चूहों को यहाँ सम्मान से पाला-पोषा जाता है। भक्त इन्हें प्रसाद भी अर्पित करते हैं। इसके अलावा मंदिर का मार्बल वास्तुशिल्प और चाँदी के विशाल द्वार इसे और भी भव्य बनाते हैं।

करणी माता मंदिर का इतिहास और कहानी
करणी माता कौन थीं?
श्री करणी माता को हिंदू धर्म में देवी दुर्गा का एक रूप और शक्ति का अवतार माना जाता है। उन्हें एक महान योगिनी, साध्वी और सिद्ध महिला के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक लोकहितकारी कार्य किए और विविध चमत्कार किए। उनका जन्म सुवाप गाँव में मेहाजी किनिया और देवल देवी के घर विक्रम संवत 1444 में अश्विन शुक्ल सप्तमी को शुक्रवार के दिन हुआ था।
करणी माता के बचपन का नाम रिधुबाई था। पांच वर्ष की आयु में रिधुबाई ने अपनी बुआ का टूटा हाथ चमत्कार से ठीक कर दिया था। इसके बाद वो करणी के नाम से प्रसिद्ध हुई।
पुराणिक कथा: चूहों का रहस्य
सबसे प्रसिद्ध कथा यह है कि करणी माता के सौतेले बेटे लक्ष्मण का देहांत हो गया था। माता ने भगवान यमराज से अपने बेटे को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया। यमराज ने कहा कि यमलोक में आकर आज तक कोई वापस नहीं गया। तब करणी माता के यमराज से कहा कि आजतक कोई माँ यमलोक में अपने पुत्र को वापस लेने आयी है? फिर उन्होंने यमराज को अपने विराट देवी रूप के दर्शन दिए। करणी माता ने कहा कि आज से मेरा कोई भी वंशज मरने के बाद यमलोक नहीं आएगा। तब से करणी माता के वंशज मरने के बाद काबा बन जाते हैं और काबा मरने के बाद करणी माता के वंश में जन्म लेते हैं।

करणी माता मंदिर दर्शन समय (Darshan Timings)
| विवरण | समय |
|---|---|
| मंदिर खुलने का समय | सुबह 4:00 बजे |
| प्रातः दर्शन | सुबह 4:00 बजे से 12:00 बजे तक |
| दोपहर विश्राम | दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक |
| सायं दर्शन | दोपहर 2:00 बजे से रात 10:00 बजे तक |
| मंदिर बंद होने का समय | रात 10:00 बजे |
करणी माता मंदिर का निर्माण और विस्तार
करणी माता मंदिर का मूल निर्माण 15वीं से 20वीं सदी के बीच हुआ था और इसे महाराजा गंगा सिंह के शासनकाल में वर्तमान रूप दिया गया। यह मंदिर राजपूत शैली और मार्बल कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
मंदिर की वास्तुकला और अनोखी परंपरा
वास्तुशिल्प रूप-रेखा
करणी माता मंदिर में सफेद संगमरमर का उपयोग किया गया है, और इसके चाँदी के दरवाजे पर देवी की लीलाओं का सुन्दर चित्रण मिलता है। मंदिर के गर्भगृह में देवी करणी माता की मूर्ति विराजमान है, जिसमें वह त्रिशूल धारण किये हुए हैं। मंदिर के दोनों ओर उनकी बहनों की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं।
करणी माता मंदिर के चूहे
करणी माता मंदिर दुनिया में लगभग 25,000 चूहों (काबा) के लिए प्रसिद्ध है। भक्त यहाँ आते समय चूहों को खाद्य पदार्थ, दूध अथवा प्रसाद अर्पित करते हैं। चूहों द्वारा पहले ग्रहण किया गया प्रसाद बाद में भक्तों को वरण (प्रसाद) के रूप में दिया जाता है। सफेद चूहा दिखना विशेष शुभ माना जाता है।
करणी माता मंदिर में चूहों के प्रति अत्यंत सम्मान होता है और किसी भी चूहे को नुकसान पहुँचाना एक गंभीर पाप माना जाता है। यदि कोई गलती से चूहे को मार देता है तो उसे उसे सोने के रूप में बदल कर मंदिर को भेंट करने की परम्परा मानी जाती है।
जलवायु और मौसम की जानकारी
बीकानेर तथा देशनोक क्षेत्र में मौसम थोडा शुष्क है क्योंकि यह राजस्थान के रेगिस्तानी हिस्से में आता है। यहाँ का मौसम वर्ष भर भिन्न-भिन्न तरह का रहता है।
गर्मियां (मार्च – जून)
गर्मियों में तापमान 40°C से ऊपर पहुंच सकता है। मंदिर दर्शन के लिए सुबह-शाम का समय अधिक सुखद होता है।
मानसून (जुलाई – सितंबर)
बारिश सामान्यतः हल्की-फुल्की होती है, और तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।
सर्दियां (दिसंबर – फरवरी)
इस मौसम में तापमान काफी कम (देर रात में 5°C से नीचे) हो सकता है। दर्शन और यात्रा के लिए यह मौसम आरामदायक माना जाता है।
ध्यान रहे कि मौसम में बदलाव स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर हो सकता है।
करणी माता मंदिर कैसे जाएँ
करणी माता मंदिर तक पहुँच कई माध्यमों से सरल और सुविधाजनक है:
सड़क मार्ग
देशनोक राजस्थान राज्य के मुख्य सड़क मार्ग NH89 से जुड़ा हुआ है। बीकानेर शहर से टैक्सी, बस या जीप के माध्यम से सीधे देशनोक पहुँच सकते हैं।
रेल मार्ग
नजदीकी रेलवे स्टेशन देशनोक रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर के पास ही स्थित है। यहाँ से ऑटो या टैक्सी लेकर मंदिर तक पहुँचना आसान है।
निकटतम हवाई अड्डा
सबसे नजदीकी हवाई अड्डा बीकानेर विमानक्षेत्र है। वहाँ पहुंचकर आप सड़क मार्ग द्वारा देशनोक पहुँच सकते हैं।
पूजा, रीतियाँ और अनुष्ठान
पूजा-अर्चना
करणी माता मंदिर प्रतिदिन सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहता है। यहां सुबह की मंगला आरती और विभिन्न पूजा-भोजन की परंपरा निभाई जाती है। भक्त देवी को विभिन्न भेंट देते हैं, जिनमें प्रसाद और विशेष पूजा शामिल हैं।
प्रमुख उत्सव और मेले
करणी माता मंदिर में वर्ष में दो बार मेले का आयोजन होता है, जो मुख्य रूप से चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि के दौरान आयोजित होते हैं। कार्तिक मास की शुक्ल चतुर्दशी के आस पास 12 कोस (36 किलोमीटर) की ओरण परिक्रमा होती हैं। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु पैदल चलकर मंदिर दर्शन करते हैं और करणी माता की ओरण परिक्रमा करते हैं। इसमें सभी आयु वर्ग के पुरुष एवं महिलाएं भाग लेती हैं।
परंपराएँ
- चूहों के लिए प्रसाद पहले रखा जाता है, उसके बाद भक्तों को वही प्रसाद दिया जाता है।
- सफेद चूहे का दर्शन शुभ संकेत माना जाता है।
सुविधाएँ और सेवाएँ
मंदिर परिसर में सुविधाएँ
- पार्किंग क्षेत्र: मंदिर के पास वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग उपलब्ध है।
- स्वच्छता और व्यवस्था: मंदिर प्रशासन परिसर की सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देता है।
स्थानीय सुविधाएँ
- भोजनालय और ढाबे: देशनोक और बीकानेर मार्ग पर कई भोजनालय उपलब्ध हैं जहाँ आप स्थानीय राजस्थानी व्यंजन प्राप्त कर सकते हैं।
- दुकानें: करणी माता मंदिर के बाहर धार्मिक वस्तुओं, प्रसाद और स्मृति चिन्ह की दुकानें मौजूद हैं।
रहने और ठहरने के विकल्प
धर्मशाला और गेस्ट हाउस
देशनोक कस्बे के आसपास मंदिर के निकट धर्मशालाएँ और सस्ते गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं जहाँ श्रद्धालु बजट दरों पर रुक सकते हैं।
होटल और लॉजिंग
- बीकानेर शहर में 3-4 स्टार होटल्स सहित कई होटलों की व्यवस्था है।
- आप अग्रिम ऑनलाइन बुकिंग कर बेहतर दरों पर कमरे सुनिश्चित कर सकते हैं।
यात्रा-समय और सुझाव
सर्वश्रेष्ठ यात्रा समय
- नवरात्रि के दिनों (चैत्र और शारदीय) में भक्तों की भारी भीड़ होती है। यदि विजय दर्शन का विशेष अनुभव चाहिए तो यही सर्वोत्तम समय है।
- अगर भीड़ से बचना चाहते हैं तो भीड़-भाड़ के समय के बाहर यात्रा करना बेहतर रहता है।
यात्रा-सुझाव
- करणी माता मंदिर में प्रवेश करने से पहले जूते/चप्पल बाहर उतारें।
- चूहों के बीच चलते समय सावधान रहें। पैर घसीट कर चलें जिससे कोई चूहा पैर के नीचे नहीं आये।
- प्रसाद ग्रहण करते समय मंदिर की परंपरा का सम्मान करें।
- अत्यधिक गर्मी के समय पानी साथ रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: करणी माता मंदिर क्यों चूहों के लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर: यहाँ हजारों चूहे रहते हैं जिन्हें काबा कहा जाता है और देवी के वंशज के रूप में पूजे जाते हैं।
प्रश्न: क्या मंदिर में प्रवेश निशुल्क है?
उत्तर: हाँ, मंदिर में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
प्रश्न: क्या चूहे भक्तों को नुकसान पहुँचाते हैं?
उत्तर: नहीं, स्थानीय मान्यता के अनुसार ये चूहे भक्तों को नुकसान नहीं पहुँचाते और यहाँ किसी प्रकार की बीमारी फैलने की खबर नहीं है।
निष्कर्ष
करणी माता मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारत की अनूठी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का प्रतीक है। इसकी परंपरा, इतिहास, और अनोखी मान्यताएँ भक्तों एवं पर्यटकों के लिए एक अद्भुत अनुभव प्रदान करती हैं। चाहे आप आस्था की तलाश में यहाँ आएँ या राजस्थान की संस्कृति का अनुभव लेना चाहें, यह स्थल हर दृष्टिकोण से अविस्मरणीय है।



