मल्लिकार्जुन मंदिर (Mallikarjun Temple) भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से दूसरा माना जाता है। आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में श्रीशैलम पर्वत पर स्थित यह मंदिर न केवल एक ज्योतिर्लिंग है, बल्कि माता सती के 51 शक्तिपीठों में से भी एक है। यहाँ शिव ‘मल्लिकार्जुन’ और शक्ति ‘भ्रमराम्बा’ के रूप में विराजमान हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से यह स्थान अत्यंत दुर्लभ है क्योंकि यहाँ शिव और शक्ति दोनों के दर्शन एक साथ प्राप्त होते हैं। श्रीशैलम को ‘दक्षिण का कैलाश’ भी कहा जाता है, जहाँ की पावन वायु मात्र से भक्तों के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं।
पौराणिक कथा और इतिहास (Mythology & History)
मल्लिकार्जुन मंदिर का इतिहास पौराणिक कथाओं और प्राचीन राजवंशों की श्रद्धा से जुड़ा है।
शिव-पार्वती और कार्तिकेय की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच विवाह को लेकर प्रतिस्पर्धा हुई, तो गणेश जी ने चतुराई से पहले विवाह कर लिया। इससे नाराज होकर कार्तिकेय क्रौंच पर्वत पर चले गए। उन्हें मनाने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती यहाँ आए और अर्जुन (शिव) व मल्लिका (पार्वती) के रूप में यहीं ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए।
ऐतिहासिक कालक्रम
इस मंदिर का उल्लेख प्राचीन पुराणों जैसे मत्स्य पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। इतिहास के पन्नों में इसका महत्व इस प्रकार है:
- सातवाहन काल: दूसरी शताब्दी के शिलालेखों में इस तीर्थ का वर्णन मिलता है।
- पल्लव और चोल वंश: 7वीं से 9वीं शताब्दी के बीच इन राजाओं ने मंदिर के विस्तार में बड़ा योगदान दिया।
- काकतीय राजवंश: 12वीं-13वीं शताब्दी में मंदिर के चारों ओर सुरक्षा दीवारों का निर्माण कराया गया।
- विजयनगर साम्राज्य: राजा हरिहर राय और कृष्णदेव राय ने यहाँ भव्य गोपुरम और मंडप बनवाए।
- छत्रपति शिवाजी महाराज: 1677 में शिवाजी महाराज ने यहाँ दक्षिण गोपुरम का निर्माण करवाया और मंदिर की सुरक्षा सुनिश्चित की।
मल्लिकार्जुन मंदिर स्थापत्य कला (Architecture)
मल्लिकार्जुन मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ शैली (Dravidian Style) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- प्राकार दीवार: मंदिर के चारों ओर एक विशाल पत्थर की दीवार है जिसे ‘प्राकार’ कहा जाता है, जिस पर हाथियों, सैनिकों और शिकार के दृश्यों की सुंदर नक्काशी है।
- गोपुरम: यहाँ के भव्य और ऊंचे प्रवेश द्वार (गोपुरम) विजयनगर वास्तुकला की छाप छोड़ते हैं।
- गर्भगृह: मुख्य ज्योतिर्लिंग छोटा है, जिसे भक्त स्पर्श करके पूजा कर सकते हैं।
- भ्रमराम्बा देवी मंदिर: मुख्य परिसर के पीछे ही शक्तिपीठ स्थित है, जहाँ माता की मूर्ति सौम्य रूप में है।
धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance)
मल्लिकार्जुन मंदिर का महत्व अन्य ज्योतिर्लिंगों से थोड़ा भिन्न है। मान्यता है कि:
- यहाँ पूजा करने से ‘अश्वमेध यज्ञ’ के समान फल प्राप्त होता है।
- श्रीशैलम के शिखर के दर्शन मात्र से ही मनुष्य पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाता है।
- यह एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही परिसर में स्थित हैं, जो पुरुष और प्रकृति के मिलन का प्रतीक है।
पूजा और दर्शन का समय (Pooja Timings & Rituals)
श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट सुबह से रात तक खुले रहते हैं:
| समय | अनुष्ठान / पूजा |
| 04:30 AM | सुप्रभातम और मंदिर के कपाट खुलना |
| 05:30 AM – 01:00 PM | सर्व दर्शन और अभिषेक |
| 05:00 PM – 09:00 PM | संध्या दर्शन और पूजा |
| 09:00 PM – 10:00 PM | एकांत सेवा और शयन आरती |
प्रमुख त्यौहार: महाशिवरात्रि, नवरात्रि और कार्तिकेय मास यहाँ बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं।
मल्लिकार्जुन मंदिर कैसे पहुँचें (Travel Guide)
श्रीशैलम (Srisailam) तक पहुँचने के लिए निम्नलिखित साधन उपलब्ध हैं:
- सड़क मार्ग: हैदराबाद (213 किमी) और विजयवाड़ा से सीधी बसें उपलब्ध हैं। यह रास्ता नल्लामाला के घने जंगलों से होकर गुजरता है, जो बहुत सुंदर है।
- रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मार्कापुर रोड (Markapur Road) है, जो यहाँ से लगभग 85 किमी दूर है।
- वायु मार्ग: सबसे नजदीकी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा हैदराबाद (RGIA) है।
आस-पास के दर्शनीय स्थल (Nearby Places)
- पाताल गंगा: कृष्णा नदी का पवित्र तट, जहाँ पहुँचने के लिए आप रोपवे (Ropeway) का आनंद ले सकते हैं।
- साक्षी गणपति: ऐसी मान्यता है कि यहाँ के गणपति भक्तों की हाजिरी दर्ज करते हैं।
- शिखरेश्वर: श्रीशैलम की सबसे ऊँची चोटी, जहाँ से पूरे मंदिर परिसर का अद्भुत दृश्य दिखता है।
- अक्का महादेवी गुफाएं: नाव के जरिए पहुँचने योग्य प्राकृतिक गुफाएं।
भक्तों के लिए विशेष सुझाव (Pro-Tips)
- ड्रेस कोड: मंदिर में पुरुषों के लिए धोती-कुर्ता और महिलाओं के लिए साड़ी या दुपट्टे के साथ सूट अनिवार्य है।
- भीड़ से बचें: महाशिवरात्रि और सप्ताहांत (Weekends) पर बहुत भीड़ होती है, संभव हो तो कार्यदिवसों (Weekdays) पर जाएँ।
- ऑनलाइन बुकिंग: शीघ्र दर्शन और अभिषेक के लिए आधिकारिक वेबसाइट से पहले टिकट बुक कर लें।
- फोटोग्राफी: मंदिर के गर्भगृह के अंदर कैमरे और मोबाइल ले जाना सख्त मना है।
निष्कर्ष (Conclusion)
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह आत्मा की शांति और ईश्वर से जुड़ने का एक पावन केंद्र है। नल्लामाला की पहाड़ियों के बीच बसे इस मंदिर की ऊर्जा आपको मंत्रमुग्ध कर देगी। यदि आप महादेव और माता शक्ति का संयुक्त आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो एक बार श्रीशैलम की यात्रा अवश्य करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. मल्लिकार्जुन मंदिर कहाँ स्थित है?
मल्लिकार्जुन मंदिर आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में श्रीशैलम की पहाड़ियों पर स्थित है।
2. क्या यहाँ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए पंजीकरण (Registration) अनिवार्य है?
सामान्य दर्शन के लिए पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है, लेकिन विशेष पूजा या अभिषेक के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुक करना बेहतर रहता है।
3. क्या श्रीशैलम में ठहरने की व्यवस्था है?
हाँ, देवस्थानम की ओर से कई गेस्ट हाउस और प्राइवेट होटल उपलब्ध हैं।
4. मल्लिकार्जुन को ‘दक्षिण का कैलाश’ क्यों कहते हैं?
अपनी अपार आध्यात्मिक शक्ति और भगवान शिव के निवास स्थान के कारण इसे दक्षिण भारत का कैलाश माना जाता है।
5. दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है?
अक्टूबर से फरवरी के बीच का मौसम यहाँ घूमने और दर्शन के लिए सबसे अनुकूल होता है।



