काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Mandir) केवल एक देवालय नहीं, बल्कि हिंदू धर्म की आस्था का वह केंद्र है जहाँ स्वयं महादेव ‘विश्वेश्वर’ के रूप में विराजमान हैं। उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) में स्थित यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रमुख माना जाता है। मान्यता है कि जब सृष्टि का अंत होगा, तब महादेव इस नगरी को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेंगे। इस पवित्र स्थल के दर्शन मात्र से मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथा और इतिहास (Mythology & History)
काशी को दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का यह आदि निवास स्थान है।
इतिहास के मुख्य पड़ाव:
- प्राचीन काल: वेदों और पुराणों में काशी का वर्णन अविमुक्त क्षेत्र के रूप में मिलता है।
- 1194 ईस्वी: कुतुबुद्दीन ऐबक की सेना ने मंदिर को भारी क्षति पहुँचाई।
- 1585 ईस्वी: राजा टोडरमल ने अकबर के शासनकाल में मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया।
- 1669 ईस्वी: औरंगजेब ने मंदिर को तुड़वाकर यहाँ ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण करवाया।
- 1780 ईस्वी: इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया।
- 1839 ईस्वी: पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर के लिए 1000 किलो सोना दान किया।
- 2021 ईस्वी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भव्य ‘काशी विश्वनाथ कॉरिडोर’ का लोकार्पण किया गया।
मंदिर का चमत्कार: लोक कथाओं के अनुसार, औरंगजेब के आक्रमण के समय शिवलिंग की रक्षा के लिए मुख्य पुजारी ज्योतिर्लिंग को लेकर पास के कुएँ (ज्ञानवापी कूप) में कूद गए थे, ताकि उसे खंडित होने से बचाया जा सके।
स्थापत्य कला (Architecture)
काशी विश्वनाथ मंदिर की वास्तुकला नागर शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर परिसर अब “कॉरिडोर” के बनने के बाद सीधे गंगा तट से जुड़ गया है।
- स्वर्ण शिखर: मंदिर के मुख्य शिखर पर शुद्ध सोने की परत चढ़ी हुई है, जो इसे अद्भुत आभा प्रदान करती है।
- गर्भगृह: मुख्य गर्भगृह के भीतर एक चांदी के मंच पर स्थापित छोटा सा काला पत्थर (ज्योतिर्लिंग) है।
- कॉरिडोर: आधुनिक सुविधाओं से लैस कॉरिडोर में चूना पत्थर और बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया है, जो प्राचीन और आधुनिक कला का संगम है।
काशी विश्वनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व (Spiritual Significance)
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, काशी “शिव की नगरी” है। यहाँ मरने वाले व्यक्ति के कान में स्वयं शिव ‘तारक मंत्र’ फूँकते हैं, जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पंचक्रोशी यात्रा और गंगा स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन का विशेष महत्व है।
पूजा और दर्शन का समय (Pooja Timings & Rituals)
मंदिर भक्तों के लिए सुबह 3:00 बजे से रात 11:00 बजे तक खुला रहता है।
| आरती का नाम | समय |
| मंगला आरती | प्रातः 03:00 – 04:00 |
| भोग आरती | दोपहर 11:15 – 12:20 |
| सप्त ऋषि आरती | शाम 07:00 – 08:15 |
| श्रृंगार/भोग आरती | रात 09:00 – 10:15 |
| शयन आरती | रात 10:30 – 11:00 |

काशी विश्वनाथ मंदिर कैसे पहुँचें (Travel Guide)
- सड़क मार्ग: वाराणसी दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों से एनएच-2 के माध्यम से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
- रेल मार्ग: वाराणसी जंक्शन (BSB) और बनारस (BSBS) प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं। मंदिर यहाँ से लगभग 4-5 किमी की दूरी पर है।
- वायु मार्ग: लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (VNS) शहर से लगभग 25 किमी दूर है।
आस-पास के दर्शनीय स्थल (Nearby Places)
- मणिकर्णिका घाट: जीवन और मृत्यु के दर्शन कराने वाला ऐतिहासिक घाट।
- दशाश्वमेध घाट: यहाँ की विश्व प्रसिद्ध ‘गंगा आरती’ देखना न भूलें।
- काल भैरव मंदिर: इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है; इनके दर्शन के बिना काशी यात्रा अधूरी मानी जाती है।
- सारनाथ: भगवान बुद्ध का प्रथम उपदेश स्थल, जो काशी से मात्र 10 किमी दूर है।
भक्तों के लिए प्रो-टिप्स (Pro-Tips)
- पहनावा: मंदिर में शालीन कपड़े पहनें। मंगला आरती के लिए पुरुषों हेतु धोती-कुर्ता अनिवार्य है।
- निषेध: कैमरा, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स मंदिर के अंदर ले जाना मना है (लॉकर की सुविधा उपलब्ध है)।
- सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मार्च तक का मौसम सुहावना होता है। सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर यहाँ अत्यधिक भीड़ रहती है।
यात्रा पैकेज और ठहरने की सुविधा
देवस्थानम पाठकों के लिए सुझाव देता है कि वे काशी दर्शन पैकेज ले सकते हैं जिसमें गंगा आरती, सारनाथ भ्रमण और नाव की सवारी शामिल होती है।
लग्जरी अनुभव के लिए ‘ब्रजरामा पैलेस‘ या बजट प्रवास के लिए गोदौलिया और अस्सी घाट के पास कई अच्छे गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं।
निष्कर्ष
काशी विश्वनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन का अनुभव है। गंगा की लहरें और बाबा के जयकारे आपके भीतर एक नई ऊर्जा भर देते हैं। क्या आपने कभी बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए हैं? अपने अनुभव नीचे कमेंट में जरूर साझा करें!
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?
वर्तमान मंदिर का निर्माण 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था।
2. क्या मंदिर में प्रवेश के लिए कोई शुल्क है?
सामान्य दर्शन निःशुल्क हैं, लेकिन विशेष आरती (जैसे मंगला आरती) के लिए ऑनलाइन बुकिंग और शुल्क देना होता है।
3. क्या मंदिर में फोटोग्राफी की अनुमति है?
नहीं, सुरक्षा कारणों से मंदिर परिसर के भीतर फोटोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित है।
4. वाराणसी पहुँचने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
वाराणसी रेल और वायु मार्ग से बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। दिल्ली या मुंबई से सीधी उड़ानें और ट्रेनें उपलब्ध हैं।
5. काशी को मोक्षदायिनी क्यों कहा जाता है?
मान्यता है कि यहाँ प्राण त्यागने वाले को भगवान शिव स्वयं तारक मंत्र सुनाते हैं, जिससे उसे पुनर्जन्म से मुक्ति मिल जाती है।



