घृष्णेश्वर मंदिर (Grishneshwar Temple) भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से अंतिम और 12वां ज्योतिर्लिंग है। महाराष्ट्र के संभाजीनगर जिले में एलोरा की गुफाओं के समीप स्थित यह मंदिर न केवल अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ की गई भक्ति की शक्ति का प्रतीक भी है। घृष्णेश्वर मंदिर का दर्शन करने मात्र से भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं और उन्हें आत्मिक शांति का अनुभव होता है।
पौराणिक कथा और इतिहास (Mythology & History)
घृष्णेश्वर मंदिर की उत्पत्ति की कथा भगवान शिव की अनन्य भक्त ‘घुश्मा’ से जुड़ी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सुधर्मा नामक ब्राह्मण की पत्नी सुदेहा के कोई संतान नहीं थी, इसलिए उसने अपनी बहन घुश्मा का विवाह अपने पति से कराया।
घुश्मा प्रतिदिन 101 पार्थिव शिवलिंग बनाकर उन्हें पास के तालाब में विसर्जित करती थी। भगवान की कृपा से उसे एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिससे ईर्ष्या वश उसकी बड़ी बहन सुदेहा ने उसके पुत्र की हत्या कर उसी तालाब में फेंक दिया। पुत्र की मृत्यु के बावजूद घुश्मा विचलित नहीं हुई और अपनी शिव पूजा जारी रखी। जब वह शिवलिंग विसर्जित करने तालाब पर गई, तो उसका पुत्र जीवित होकर बाहर निकल आया। तब भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और घुश्मा के नाम पर यहाँ ‘घुश्मेश्वर’ या ‘घृष्णेश्वर’ के रूप में विराजमान हो गए।
ऐतिहासिक तथ्य और जीर्णोद्धार:
- 16वीं शताब्दी: मालोजी भोसले (छत्रपति शिवाजी महाराज के दादा) ने मंदिर का बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार कराया।
- 18वीं शताब्दी: इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने वर्तमान मंदिर संरचना का पुनर्निर्माण कराया, जब मुगल आक्रमणों के दौरान इसे क्षति पहुँची थी।
- स्थापत्य काल: यह मंदिर लाल चट्टानों से बना है और मराठा वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण पेश करता है।
स्थापत्य कला (Architecture)
घृष्णेश्वर मंदिर का निर्माण लाल पत्थर (Red Rocks) से किया गया है, जो देखने में अत्यंत भव्य लगता है।
- शिखर: मंदिर का शिखर पांच स्तरों वाला है, जिस पर बारीक नक्काशी और देवताओं की मूर्तियाँ उकेरी गई हैं।
- गर्भगृह: यहाँ का ज्योतिर्लिंग पूर्वमुखी है। मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते समय पुरुषों को परंपरा के अनुसार अपने ऊपरी वस्त्र (कमीज/टी-शर्ट) उतारने पड़ते हैं।
- नंदी मंडप: मुख्य मंदिर के सामने भगवान शिव के वाहन नंदी की एक विशाल और सुंदर प्रतिमा स्थापित है।
घृष्णेश्वर मंदिर धार्मिक महत्व (Spiritual Significance)
माना जाता है कि यह ज्योतिर्लिंग ‘न्याय’ और ‘पुनर्जन्म’ का प्रतीक है। निसंतान दंपत्ति यहाँ विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना के साथ आते हैं। मंदिर के जल (शिवालय सरोवर) को भी अत्यंत पवित्र माना जाता है, जिसमें स्नान करने से बीमारियाँ दूर होती हैं।
घृष्णेश्वर मंदिर पूजा और दर्शन का समय (Pooja Timings & Rituals)
भक्तों के लिए मंदिर के द्वार सुबह जल्दी खुल जाते हैं:
- सामान्य दर्शन: सुबह 5:30 बजे से रात 9:30 बजे तक।
- श्रावण मास: इस दौरान समय बढ़ा दिया जाता है (रात 11:00 बजे तक)।
- महाशिवरात्रि: यह यहाँ का सबसे बड़ा उत्सव है, जहाँ लाखों की भीड़ जुटती है।
घृष्णेश्वर मंदिर यात्रा मार्गदर्शक (How to Reach)
- सड़क मार्ग: संभाजीनगर से यह लगभग 30 किमी दूर है। यहाँ के लिए नियमित बसें और निजी टैक्सी उपलब्ध हैं।
- रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन संभाजीनगर है, जो देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा है।
- वायु मार्ग: संभाजीनगर हवाई अड्डा निकटतम है, जहाँ से आप टैक्सी लेकर मंदिर पहुँच सकते हैं।
आस-पास के दर्शनीय स्थल (Nearby Places)
- एलोरा की गुफाएं (Ellora Caves): मंदिर से मात्र 1-2 किमी की दूरी पर स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर।
- दौलताबाद किला: एक अभेद्य ऐतिहासिक किला जो अपनी इंजीनियरिंग के लिए प्रसिद्ध है।
- भद्रा मारुति मंदिर: यहाँ भगवान हनुमान की लेटी हुई प्रतिमा है, जो मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुझाव (Pro-Tips)
- ड्रेस कोड: पुरुषों को गर्भगृह में जाने के लिए शर्ट उतारनी अनिवार्य है। महिलाओं के लिए साड़ी या सूट उपयुक्त है।
- फोटोग्राफी: मंदिर के भीतर फोटो खींचना सख्त वर्जित है।
- दर्शन की योजना: devsthanam.com पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भीड़ से बचने के लिए सुबह जल्दी (ब्रह्म मुहूर्त) दर्शन करना सबसे उत्तम रहता है।
- ठहरने की जगह: मंदिर के पास कई धर्मशालाएं और ‘होटल कैलाश’ जैसे अच्छे विकल्प उपलब्ध हैं।
निष्कर्ष
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि इतिहास और आध्यात्मिकता का संगम है। यदि आप अपने जीवन में शांति और महादेव का आशीर्वाद चाहते हैं, तो एक बार यहाँ के दर्शन अवश्य करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. घृष्णेश्वर मंदिर किस जिले में स्थित है?
यह महाराष्ट्र के संभाजीनगर जिले में एलोरा के पास स्थित है।
2. क्या मंदिर में पुरुषों के लिए कोई विशेष नियम है?
हाँ, गर्भगृह में प्रवेश के लिए पुरुषों को कमर से ऊपर के कपड़े उतारने होते हैं।
3. दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है?
अक्टूबर से मार्च के बीच का मौसम सुखद होता है। सावन और महाशिवरात्रि पर यहाँ विशेष रौनक रहती है।
4. मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?
वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण 18वीं शताब्दी में रानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था।
5. क्या एलोरा की गुफाएं और घृष्णेश्वर मंदिर एक ही दिन में देखे जा सकते हैं?
हाँ, ये दोनों स्थान एक-दूसरे के बेहद करीब हैं और 3-4 घंटे में आसानी से देखे जा सकते हैं।



