विदेशों में स्थित प्रमुख हिंदू मंदिर

हिंदुओं की आस्था के प्रतीक: विदेशों में स्थित प्रमुख हिंदू मंदिरों की विस्तृत झलक

भारत से बाहर स्थित हिंदू मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं हैं, बल्कि वे सांस्कृतिक राजदूत, स्थापत्य के अद्भुत नमूने और प्रवासी भारतीयों की आस्था व पहचान के केंद्र हैं। इन मंदिरों ने हिंदू धर्म को वैश्विक धर्म बनाने और सनातन मूल्यों को विश्वपटल पर प्रतिष्ठित करने में अहम् भूमिका निभाई है। आइए, ऐसे ही कुछ विदेशों में स्थित प्रमुख हिंदू मंदिरों चमत्कारिक और ऐतिहासिक विषय में विस्तार से जानते हैं।

1. प्रम्बनन मंदिर परिसर, इंडोनेशिया (Prambanan Temple Compounds)

  • स्थान: जावा द्वीप, इंडोनेशिया
  • देवता: त्रिमूर्ति – ब्रह्मा, विष्णु, महेश (शिव)
  • निर्माण काल: 9वीं शताब्दी ईस्वी (मताराम राजवंश)
  • विशेषता: यह मंदिर परिसर यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है और इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। मुख्य मंदिर शिव को समर्पित है, जिसकी ऊंचाई 47 मीटर है। परिसर में विष्णु और ब्रह्मा के मंदिर भी हैं। रामायण पर आधारित शिल्पकारी और भव्य ‘कंडी’ (स्तूपनुमा शिखर) इसकी पहचान हैं। हर साल यहाँ हजारों पर्यटक और भक्त रामायण बैले नृत्य नाटक देखने आते हैं।

2. अंगकोर वाट, कंबोडिया (Angkor Wat)

  • स्थान: सिएम रीप, कंबोडिया
  • देवता: मूल रूप से विष्णु को समर्पित, बाद में बौद्ध मंदिर
  • निर्माण काल: 12वीं शताब्दी (सम्राट सूर्यवर्मन द्वितीय)
  • विशेषता: दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक और कंबोडिया का राष्ट्रीय प्रतीक। यह मंदिर हिंदू ब्रह्माण्ड विज्ञान का प्रतीक है, जिसके केंद्र में पांच शिखर ‘मेरु पर्वत’ का प्रतिनिधित्व करते हैं। दीवारों पर हिंदू पौराणिक कथाओं, विशेष रूप से ‘समुद्र मंथन’ और ‘रामायण’ के दृश्य उत्कीर्ण हैं। यह हिंदू-बौद्ध स्थापत्य कला का अनुपम संगम है।

3. मुरुगन मंदिर, बैटु केव्स, मलेशिया (Batu Caves Murugan Temple)

  • स्थान: कुआलालंपुर, मलेशिया
  • देवता: भगवान मुरुगन (कार्तिकेय)
  • निर्माण काल: गुफाओं का प्राकृतिक निर्माण, मंदिर 1891 में स्थापित
  • विशेषता: यह मंदिर 400 मीटर चूना पत्थर की पहाड़ी में स्थित है। यहाँ दुनिया की सबसे ऊँची (42.7 मीटर) भगवान मुरुगन की प्रतिमा स्थित है। मुख्य गुफा ‘टेम्पल केव’ तक पहुँचने के लिए 272 रंगीन सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। प्रति वर्ष आयोजित होने वाला थाईपुसम उत्सव यहाँ दस लाख से अधिक भक्तों को आकर्षित करता है, जो ‘कवड़ी’ उठाकर चढ़ाई करते हैं।

4. श्री स्वामीनारायण मंदिर, लंदन (BAPS Shri Swaminarayan Mandir, London)

  • स्थान: नीस्डन, लंदन, यूनाइटेड किंगडम
  • देवता: श्री स्वामीनारायण
  • निर्माण काल: 1995 में पूर्ण
  • विशेषता: यूरोप का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर और भारत से बाहर सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में से एक। इसका निर्माण पूरी तरह से भारतीय मूर्तिकला शैली में, इटली के काररा संगमरमर व बुल्गारिया के चूना पत्थर से हुआ है। बिना किसी लोहे या स्टील के, केवल पत्थरों को जोड़कर बनाया गया यह मंदिर आधुनिक समय का एक अद्भुत चमत्कार है। यहाँ एक सांस्कृतिक केंद्र ‘हवेली’ भी है।

5. श्री वेंकटेश्वर मंदिर, ऑस्ट्रेलिया (Sri Venkateswara Temple, Helensburgh)

  • स्थान: हेलेन्सबर्ग, न्यू साउथ वेल्स, ऑस्ट्रेलिया
  • देवता: भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी)
  • निर्माण काल: 1985 में प्रतिष्ठा
  • विशेषता: यह ऑस्ट्रेलिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा हिंदू मंदिर माना जाता है। तिरुमला के मूल मंदिर की तर्ज पर दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली में निर्मित, यह मंदिर तिरुपति बालाजी की पवित्रता का प्रतिनिधित्व करता है। विशाल प्रांगण, राजगोपुरम और श्रीनिवास कल्याणम जैसे त्यौहार यहाँ के आकर्षण हैं। यह प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक-धार्मिक केंद्र है।

6. पशुपतिनाथ मंदिर, नेपाल (Pashupatinath Temple)

  • स्थान: काठमांडू, नेपाल
  • देवता: भगवान शिव (पशुपतिनाथ)
  • निर्माण काल: 5वीं शताब्दी ईस्वी (अनुमानित)
  • विशेषता: नेपाल का राष्ट्रीय देवता और विश्व के प्रमुख शिव मंदिरों में से एक। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। मंदिर पगोडा शैली में बना है जिसमें चार दरवाजे चाँदी से मढ़े हैं। बागमती नदी के किनारे स्थित यह मंदिर हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण अंतिम संस्कार स्थल भी है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ हज़ारों साधु-संत और भक्त एकत्रित होते हैं।

7. श्री सिवा-विष्णु मंदिर, अमेरिका (Sri Siva-Vishnu Temple, Livermore)

  • स्थान: लिवरमोर, कैलिफोर्निया, USA
  • देवता: शिव और विष्णु
  • निर्माण काल: 1986 में प्रतिष्ठा
  • विशेषता: उत्तरी अमेरिका के सबसे बड़े और प्रमुख हिंदू मंदिरों में से एक। इसकी वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली का अनुपम उदाहरण है। मंदिर में प्रमुख देवताओं के अलावा अय्यप्पा, वेंकटेश्वर और दुर्गा के भी विशाल मंडप हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र है बल्कि योग, संस्कृति और शिक्षा के कार्यक्रम भी आयोजित करता है।

8. श्री शिव सुब्रमण्यम मंदिर, फिजी (Sri Siva Subramaniya Temple, Nadi)

  • स्थान: नाडी, फिजी
  • देवता: भगवान मुरुगन (सुब्रमण्यम) तथा शिव, गणेश, राधा-कृष्ण
  • निर्माण काल: 1976 में नए स्वरूप में पुनर्निर्मित
  • विशेषता: दक्षिणी गोलार्द्ध का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर माना जाता है। इसकी वास्तुकला दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली का शानदार उदाहरण है, जिसके ऊंचे ‘गोपुरम’ (प्रवेश द्वार) पर अत्यंत जटिल और रंगीन देवी-देवताओं की मूर्तियां बनी हैं। यह मंदिर फिजी में बसे भारतीय मूल के लोगों की गहरी आस्था और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

9. बीएपीएस श्री स्वामीनारायण अक्षरधाम, यूएसए (BAPS Shri Swaminarayan Akshardham, Robbinsville, NJ)

  • स्थान: रॉबिंसविल, न्यू जर्सी, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • देवता: श्री स्वामीनारायण, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती आदि
  • निर्माण काल: 2023 में विधिवत प्रतिष्ठा
  • विशेषता: भारत के बाहर निर्मित सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसर के रूप में प्रसिद्ध। यह मंदिर विशुद्ध रूप से भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार, इटली के काररा संगमरमर, तुर्की के चूना पत्थर और भारतीय गुलाबी पत्थर से निर्मित है। इसके निर्माण में किसी लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया गया है। 183 एकड़ में फैले परिसर में एक विशाल मुख्य मंदिर, प्रदर्शनी हॉल और सुंदर बगीचे हैं। यह हिंदू कला, संस्कृति और मूल्यों का एक वैश्विक केंद्र है।

10. बीएपीएस हिंदू मंदिर, अबू धाबी (BAPS Hindu Mandir, Abu Dhabi)

  • स्थान: अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात
  • देवता: श्री स्वामीनारायण, अयोध्या के राम, दिल्ली के अक्षरधाम के देवता
  • निर्माण काल: फरवरी 2024 में विधिवत प्रतिष्ठा
  • विशेषता: अरब जगत का पहला पारंपरिक हिंदू पत्थर मंदिर। इसका निर्माण भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार गुलाबी राजस्थानी बलुआ पत्थर और इतालवी काररा संगमरमर से हुआ है। मंदिर में सात शिखर हैं, जो सात अमीरात का प्रतीक हैं। यह मंदिर अंतरधार्मिक सद्भाव और संयुक्त अरब अमीरात की सांस्कृतिक समावेशिता की मिसाल है। परिसर में एक आगंतुक केंद्र, प्रदर्शनी, बच्चों का पुस्तकालय और बगीचे हैं।

11. श्री वेंकटेश्वर मंदिर, हेलेन्सबर्ग, ऑस्ट्रेलिया (Sri Venkateswara Temple, Helensburgh)

स्थान: हेलेन्सबर्ग, न्यू साउथ वेल्स, सिडनी के निकट, ऑस्ट्रेलिया
देवता: भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी), साथ में देवी पद्मावती और भगवान गणेश।
निर्माण काल: 1985 में विधिवत प्रतिष्ठा।
विशेषता: यह मंदिर ऑस्ट्रेलिया का पहला और सबसे बड़ा श्री वेंकटेश्वर मंदिर है, जिसे आंध्र प्रदेश के तिरुमला में स्थित मूल तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। इसकी वास्तुकला दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली का शुद्ध उदाहरण है, जिसमें एक भव्य राजगोपुरम (प्रवेश द्वार) और विशाल प्रांगण शामिल हैं।


12. श्री सिवा-विष्णु मंदिर, लिवरमोर, कैलिफोर्निया, यूएसए (Sri Siva-Vishnu Temple, Livermore)

स्थान: लिवरमोर, कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका
देवता: मुख्य रूप से भगवान शिव और भगवान विष्णु, साथ ही कई अन्य देवी-देवताओं के अलग मंडप।
निर्माण काल: 1986 में विधिवत प्रतिष्ठा।
विशेषता: यह मंदिर उत्तरी अमेरिका के सबसे बड़े और सबसे सक्रिय हिंदू मंदिर परिसरों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह शैव और वैष्णव दोनों संप्रदायों को एक ही परिसर में समान रूप से स्थान देता है, जो सांप्रदायिक सद्भाव और हिंदू धर्म की एकात्मकता का प्रतीक है।

13. चंगुनारायण मंदिर (Changu Narayan Temple):

  • स्थान: भक्तपुर जिला, काठमांडू घाटी, नेपाल
  • देवता: भगवान विष्णु (नारायण)
  • विशेषता: यह मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और इसे नेपाल का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है (5वीं शताब्दी)। मंदिर पगोडा शैली में बना है और यह किरात काल की वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर परिसर में लिच्छवि काल की प्राचीन शिलालेख और पत्थर पर उकेरी गई अद्भुत मूर्तियाँ हैं, जो विष्णु के दस अवतारों को दर्शाती हैं। यह स्थल इतिहास, कला और आस्था का अनूठा संगम है।

सांस्कृतिक महत्व और वैश्विक प्रभाव:

ये मंदिर हिंदू धर्म की सार्वभौमिकता और समावेशिता के प्रमाण हैं। ये प्रवासी भारतीयों को उनकी जड़ों से जोड़े रखते हैं और नई पीढ़ियों को सनातन संस्कृति से परिचित कराते हैं। साथ ही, ये गैर-भारतीयों के लिए हिंदू दर्शन, कला और आध्यात्मिकता को समझने का एक प्रवेश द्वार हैं।

निष्कर्ष:

विदेशों में स्थित ये प्रसिद्ध हिंदू मंदिर केवल पत्थरों और मूर्तियों की संरचना नहीं हैं। वे जीवंत सांस्कृतिक धरोहर हैं जो सदियों से मानवीय आस्था, कलात्मक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक सद्भाव की गाथा कह रहे हैं। ये मंदिर इस बात का प्रतीक हैं कि धर्म और आस्था की कोई सीमा नहीं होती; वह देश-काल की सीमाओं को लांघकर मानव हृदय में अपनी जगह बना लेती है।

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