BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर

BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर: भारत के अक्षरधाम से विदेशों में मंदिर

BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता के प्रतीक हैं। भारत में इन्हें अक्षरधाम मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। बीएपीएस (बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) द्वारा निर्मित ये मंदिर न केवल धार्मिक स्थल हैं, बल्कि वास्तुकला, संस्कृति और शिक्षा के अद्वितीय केंद्र भी हैं। भारत ही नहीं, बल्कि सात समुंदर पार भी ये मंदिर केवल पत्थर की इमारतें नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के जीवंत केंद्र बन चुके हैं।

BAPS (Bochasanwasi Shri Akshar Purushottam Swaminarayan Sanstha) स्वामीनारायण सम्प्रदाय की एक प्रमुख शाखा है, जिसकी स्थापना 1907 में शास्त्रीजी महाराज (श्री योगीजी महाराज) ने की थी। इसका आध्यात्मिक आधार भगवान स्वामीनारायण के दर्शन और अक्षर-पुरुषोत्तम की अवधारणा पर टिका है। इस दर्शन के अनुसार, परमात्मा (पुरुषोत्तम) और उनका आदर्श भक्त (अक्षर) सदैव एक-दूसरे के साथ विद्यमान रहते हैं। वर्तमान में, बीएपीएस के मार्गदर्शक प्रमुख स्वामी महाराज हैं। इस संस्था का उद्देश्य व्यक्तिगत चरित्र निर्माण, परिवार कल्याण और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है।

क्या है BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर

BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर सनातन धर्म की भव्यता को दर्शाने वाला एक दिव्य परिसर है। यह मंदिर अपनी बेजोड़ नक्काशी, पत्थर की शिल्पकारी और शांतिपूर्ण वातावरण के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। दिल्ली और गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर भारत के सबसे प्रमुख पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्रों में गिने जाते हैं। यहाँ केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि प्रदर्शनी हॉल, विशाल बगीचे, संगीतमय फव्वारे (Water Show) और ज्ञानवर्धक नौका विहार (Boat Ride) भी होते हैं।

यहाँ किसकी पूजा होती है

अक्षरधाम मंदिरों में मुख्य रूप से भगवान स्वामीनारायण (1781-1830) की पूजा होती है।

  • मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान स्वामीनारायण की विशाल मूर्ति विराजमान होती है।
  • उनके साथ उनके पांच उत्तराधिकारियों (अक्षरब्रह्म गुरुओं) की मूर्तियां भी होती हैं।
  • इसके अलावा, इन मंदिरों में हिंदू धर्म के अन्य प्रमुख देवताओं जैसे राधा-कृष्ण, सीता-राम, लक्ष्मी-नारायण और शिव-पार्वती की भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है।

कौन थे भगवान स्वामीनारायण

भगवान स्वामीनारायण (1781-1830) भारतीय आध्यात्मिक जगत के एक महान समाज सुधारक और प्रभावशाली संत थे। उनका जन्म 3 अप्रैल, 1781 (चैत्र शुक्ल नवमी) को उत्तर प्रदेश के छपिया गाँव में हुआ था। बचपन में उनका नाम घनश्याम पांडे था। उनकी असाधारण बुद्धि और आध्यात्मिक रुचि बचपन से ही दिखाई देने लगी थी। भगवान स्वामीनारायण के अनुयायी उनके श्री कृष्ण का अवतार मानते हैं।

नीलकंठ वर्णी की यात्रा

मात्र 11 वर्ष की आयु में, उन्होंने गृहत्याग कर दिया और ‘नीलकंठ वर्णी’ के रूप में पूरे भारत की सात साल लंबी पदयात्रा की। इस दौरान उन्होंने हिमालय के मानसरोवर से लेकर दक्षिण के रामेश्वरम तक की यात्रा की और कठिन तपस्या की। अंत में, वे गुजरात पहुंचे जहां उनकी मुलाकात रामानंद स्वामी से हुई।

स्वामीनारायण संप्रदाय की स्थापना

रामानंद स्वामी ने उन्हें दीक्षा दी और अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। उनके बाद, उन्होंने लोगों को एक नया मंत्र दिया— ‘स्वामीनारायण’। उन्होंने शुद्ध भक्ति, अहिंसा और नैतिकता पर आधारित ‘स्वामीनारायण संप्रदाय’ की नींव रखी।

प्रमुख सुधार और दर्शन

  • समाज सुधार: उन्होंने सती प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या और बलि प्रथा जैसी कुरीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाई।
  • व्यसन मुक्ति: उन्होंने लाखों लोगों को मांस, मदिरा और अन्य व्यसनों से मुक्त कर एक सात्विक जीवन जीने की प्रेरणा दी।
  • शिक्षा: उन्होंने ‘शिक्षापत्री’ नामक ग्रंथ लिखा, जो जीवन जीने की नियमावली है। इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यवहार के 212 श्लोक दिए गए हैं।
  • अक्षर-पुरुषोत्तम दर्शन: उनका मुख्य सिद्धांत था कि आत्मा को ‘अक्षररूप’ (ब्रह्मरूप) बनकर परमात्मा (पुरुषोत्तम) की भक्ति करनी चाहिए।

मंदिर निर्माण

भगवान स्वामीनारायण ने अपने जीवनकाल में गुजरात में अहमदाबाद, गढडा, वड़ताल जैसे छह भव्य शिखरबद्ध मंदिरों का निर्माण करवाया, ताकि लोग भक्ति मार्ग से जुड़े रहें। आज उनकी विरासत को BAPS जैसी संस्थाएं अक्षरधाम मंदिरों के माध्यम से पूरी दुनिया में फैला रही हैं।

भगवान स्वामीनारायण ने धर्म को केवल कर्मकांडों से निकालकर उसे ‘चरित्र और सेवा’ से जोड़ा। 1830 में उन्होंने गुजरात के गढडा में अपना देह त्याग किया, लेकिन उनके विचार आज भी करोड़ों लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

भारत के प्रमुख BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर

सर्वप्रथम, अक्षरधाम’ और ‘BAPS मंदिर’ में अंतर समझना जरूरी है:

  • BAPS स्वामीनारायण मंदिर: पूरी दुनिया में इनकी संख्या 1,500 से अधिक है। ये मंदिर हर बड़े शहर (जैसे लंदन, टोरंटो, सिडनी, मुंबई) में स्थित हैं। इन्हें आमतौर पर “BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर” कहा जाता है।
  • अक्षरधाम (Akshardham): यह शब्द केवल उन महा-परिसरों (Mega-complexes) के लिए उपयोग किया जाता है जहाँ मंदिर के साथ-साथ विशाल प्रदर्शनियाँ (Exhibitions), रिसर्च सेंटर और बड़े सांस्कृतिक उद्यान होते हैं।

यदि हम केवल ‘अक्षरधाम’ नाम वाले मुख्य केंद्रों की बात करें, तो वर्तमान में क्रियाशील रूप से 3 (गांधीनगर, दिल्ली, और न्यू जर्सी) ही प्रमुख हैं।

1. स्वामीनारायण अक्षरधाम, नई दिल्ली

BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर
अक्षरधाम मंदिर, दिल्ली

यह भारत का सबसे प्रसिद्ध और विशाल BAPS मंदिर परिसर है।

  • महत्व: इसे 2005 में राष्ट्र को समर्पित किया गया था। यह दुनिया के सबसे बड़े व्यापक हिंदू मंदिरों में से एक के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
  • विशेषता: मुख्य मंदिर 141 फीट ऊंचा है। यहाँ की संस्कृति विहार (बोट राइड) पर्यटकों को भारत के 10,000 साल पुराने इतिहास की यात्रा कराती है। यहाँ का सहज आनंद वाटर शो पूरे एशिया में प्रसिद्ध है।

2. स्वामीनारायण अक्षरधाम, गांधीनगर (गुजरात)

यह BAPS द्वारा बनाया गया पहला ‘अक्षरधाम’ है, जिसका उद्घाटन 1992 में हुआ था।

  • महत्व: यह गुजरात में आध्यात्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा केंद्र है।
  • विशेषता: पूरा मंदिर 6,000 टन गुलाबी बलुआ पत्थर से बना है। यहाँ का सत्-चित-आनंद वाटर शो और अभिषेक मंडप भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।

3. श्री स्वामीनारायण मंदिर, बोचासण (गुजरात)

यह मंदिर BAPS के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण है।

  • महत्व: 1907 में शास्त्रीजी महाराज ने इसी स्थान से BAPS (बोचासणवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) की औपचारिक स्थापना की थी।
  • विशेषता: यह संस्था का पहला मंदिर है और इसे ‘संस्था की मातृ संस्था’ (Mother Institution) माना जाता है।

4. श्री स्वामीनारायण मंदिर, गोंडल (गुजरात)

इसे ‘अक्षर मंदिर’ के नाम से जाना जाता है।

  • महत्व: यह भगवान स्वामीनारायण के दूसरे आध्यात्मिक उत्तराधिकारी गुणातीतानंद स्वामी का विश्राम स्थल (समाधि स्थान) है।
  • विशेषता: यहाँ का वातावरण अत्यंत शांतिपूर्ण है और इसे स्वामीनारायण संप्रदाय के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है।

5. प्रमुख शहरों के अन्य भव्य मंदिर

BAPS के मंदिर भारत के लगभग हर बड़े शहर में अपनी स्वच्छता और नक्काशी के लिए जाने जाते हैं:

  • मुंबई (दादर): व्यस्त शहर के बीच में स्थित यह मंदिर शांति का द्वीप है। इसकी पारंपरिक नक्काशी देखने लायक है।
  • अहमदाबाद (शाहीबाग): यहाँ संस्था का मुख्य मुख्यालय है। यह मंदिर अपनी भव्यता और सामाजिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
  • सूरत और वड़ोदरा: इन शहरों में बने मंदिर स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने हैं और यहाँ की सभाओं में हजारों युवा भाग लेते हैं।
  • जयपुर (राजस्थान): गुलाबी शहर में बना यह मंदिर पूरी तरह से सफेद संगमरमर से निर्मित है और बहुत ही सुंदर दिखता है।

विदेशों के प्रमुख बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर

1. स्वामीनारायण अक्षरधाम, न्यूयॉर्क (रॉबिन्सविले, अमेरिका)

BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर
अक्षरधाम मंदिर, अमेरिका

यह हाल ही में (2023) पूर्ण हुआ एक महा-परियोजना है।

  • महत्व: यह आधुनिक युग में भारत के बाहर बना दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है।
  • विशेषता: इसे बनाने में 12,500 से अधिक स्वयंसेवकों ने हाथ बँटाया। यहाँ का ब्रह्मकुंड (पवित्र जलाशय) दुनिया भर की 300 से अधिक नदियों के जल से भरा गया है।

2. श्री स्वामीनारायण मंदिर, लंदन (नीस्डेन मंदिर)

यह यूरोप का पहला पारंपरिक नक्काशीदार हिंदू मंदिर है।

  • विशेषता: इसे 1995 में खोला गया था। इसकी बाहरी बनावट बल्गेरियाई चूना पत्थर से और अंदरूनी हिस्सा इतालवी संगमरमर से बना है।
  • सम्मान: इसे अपनी भव्यता के कारण गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिला है और यह यूके के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।

3. अबू धाबी बीएपीएस हिंदू मंदिर (UAE)

यह खाड़ी देशों में बना पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है।

  • महत्व: यह मुस्लिम राष्ट्र में सहिष्णुता और धार्मिक सद्भाव का प्रतीक है।
  • विशेषता: इस मंदिर में सात शिखर हैं, जो UAE की सात अमीरातों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

4. अन्य महत्वपूर्ण मंदिर:

  • टोरंटो (कनाडा): सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर कनाडा के सबसे सुंदर स्थलों में गिना जाता है।
  • नैरोबी (कीनिया): यह अफ्रीका का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है, जिसकी नक्काशी देखने लायक है।
  • सिडनी (ऑस्ट्रेलिया): यहाँ का मंदिर ऑस्ट्रेलियाई भारतीय समुदाय की सांस्कृतिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र है।

बीएपीएस स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर प्रमुख विशेषताएं

  • पत्थर की नक्काशी: हर मंदिर गुलाबी बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर पर बारीक हाथ से की गई नक्काशी का एक जीवंत संग्रहालय है। इनमें देवी-देवताओं, पौराणिक गाथाओं, पशु-पक्षियों और वनस्पतियों के चित्र उकेरे गए हैं।
  • शिखर और गुंबद: मंदिरों के ऊंचे शिखर (गर्भगृह के ऊपर) और अलंकृत गुंबद आकाश को चूमते प्रतीत होते हैं, जो आध्यात्मिक उत्थान का प्रतीक हैं।
  • प्रवेश द्वार (गोपुरम): विशाल और सजावटी प्रवेश द्वार भक्तों को दिव्य लोक में प्रवेश का अनुभव कराते हैं।
  • हरित (पर्यावरण-अनुकूल) तकनीक: आधुनिक BAPS मंदिर निर्माण में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाती है। इसमें सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, ऊर्जा-बचत प्रणाली और प्राकृतिक वेंटिलेशन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

इन मंदिरों की कुछ अनूठी समानताएं:

  1. लोहे का उपयोग नहीं: अक्षरधाम मंदिरों के मुख्य ढांचे के निर्माण में स्टील या लोहे का उपयोग नहीं किया गया है, ताकि मंदिर हजारों वर्षों तक सुरक्षित रहे।
  2. प्रेमवती फूड कोर्ट: यहाँ शुद्ध और सात्विक शाकाहारी भोजन मिलता है, जो स्वामीनारायण परंपरा के अनुसार बनाया जाता है।
  3. शांति का वातावरण: यहाँ के ‘लोटस गार्डन’ (कमल के आकार का उद्यान) और हरियाली भक्तों को मानसिक शांति प्रदान करती है।

यात्रा हेतु महत्वपूर्ण जानकारी:

  • खुलने का समय: सुबह 9:30 AM से रात 8:00 PM तक (सोमवार को दिल्ली और गांधीनगर दोनों मंदिर बंद रहते हैं)।
  • प्रवेश शुल्क: परिसर में प्रवेश निःशुल्क है, लेकिन प्रदर्शनी और वाटर शो के लिए टिकट लेना होता है।
  • नियम: मोबाइल फोन, कैमरा, हेडफोन और कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान अंदर ले जाना पूरी तरह वर्जित है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते हैं।

भक्तों के लिए विशेष सुझाव (Pro-Tips)

  • ड्रेस कोड: शालीन और पारंपरिक वस्त्र पहनें। हाफ पैंट या छोटे कपड़ों में प्रवेश वर्जित हो सकता है।
  • फोटोग्राफी: मुख्य मंदिर के भीतर मोबाइल और कैमरा ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। सामान रखने के लिए सुरक्षित ‘क्लॉक रूम’ की सुविधा उपलब्ध है।
  • समय प्रबंधन: दिल्ली या न्यूयॉर्क अक्षरधाम घूमने के लिए कम से कम 4-5 घंटे का समय निकालें।

निष्कर्ष

BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर केवल ईंट-पत्थर की संरचनाएं नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की आध्यात्मिक चेतना का प्रतिबिंब हैं। ये मंदिर हमें सिखाते हैं कि कैसे अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी हम वैश्विक स्तर पर चमक सकते हैं। यदि आप शांति और कला के अद्भुत संगम की तलाश में हैं, तो जीवन में एक बार अक्षरधाम के दर्शन अवश्य करें।

भारत के अन्य प्रमुख मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़ें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *