तिरुपति बालाजी मंदिर वेंकटेश्वर स्वामी

तिरुपति बालाजी मंदिर वेंकटेश्वर स्वामी, आंध्र प्रदेश – संपूर्ण जानकारी

भारत के सबसे पवित्र और व्यस्त तीर्थस्थलों में से एक, श्री तिरुपति बालाजी मंदिर, न केवल एक धार्मिक केंद्र बल्कि आस्था, इतिहास और अद्भुत वास्तुकला का अद्वितीय संगम है। तिरुपति शहर से लगभग 23 किलोमीटर दूर तिरुमला की पहाड़ियों (समुद्र तल से 853 मीटर ऊँचाई) पर स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर, भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी) को समर्पित है, जिन्हें विष्णु के अवतार माना जाता है। प्रतिदिन औसतन 50,000 से अधिक और विशेष अवसरों पर 5 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को आकर्षित करने वाला यह मंदिर, दुनिया के सबसे अमीर धार्मिक संस्थानों में गिना जाता है। इसकी महिमा सिर्फ धन से नहीं, बल्कि यहाँ की अनूठी आध्यात्मिक ऊर्जा, वैज्ञानिक रहस्यों और सदियों से चली आ रही अटूट परंपराओं से बँधी है।


तिरुपति बालाजी मंदिर पौराणिक महत्व और कथाएँ

भगवान वेंकटेश्वर की पौराणिक कथा

1. भृगु ऋषि का अपमान और माता लक्ष्मी का क्रोध

कथा के अनुसार, एक बार महर्षि भृगु ने यह तय करने के लिए कि त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) में सबसे श्रेष्ठ कौन है, वैकुंठ की यात्रा की। जब वे वैकुंठ पहुंचे, तो भगवान विष्णु योग निद्रा में थे। अपनी उपेक्षा से क्रोधित होकर भृगु ऋषि ने विष्णु जी के वक्ष (छाती) पर लात मार दी।

  • विक्षोभ: विष्णु जी ने क्रोध करने के बजाय ऋषि का पैर सहलाया, लेकिन माता लक्ष्मी (जो भगवान की छाती में ही निवास करती हैं) अपने निवास स्थान पर इस प्रहार से अत्यंत क्रोधित हो गईं। उन्होंने भगवान विष्णु का त्याग कर दिया और पृथ्वी पर कोल्हापुर में तपस्या करने चली गईं।

2. विष्णु जी का ‘श्रीनिवास’ अवतार

माता लक्ष्मी के बिना वैकुंठ उजाड़ हो गया। उन्हें ढूंढते हुए भगवान विष्णु ने ‘श्रीनिवास’ के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया। वे तिरुमाला की पहाड़ियों पर एक चींटी के बिल (Anthill) में रहने लगे। वहाँ ब्रह्मा और शिव जी ने गाय और बछड़े का रूप लिया ताकि वे श्रीनिवास को दूध पिला सकें।

3. पद्मावती से विवाह और कुबेर का ऋण

श्रीनिवास को स्थानीय राजा आकाश राजा की पुत्री पद्मावती (जो स्वयं माता लक्ष्मी का अंश थीं) से प्रेम हो गया। जब विवाह की बात आई, तो श्रीनिवास (जो एक साधारण चरवाहे के वेश में थे) के पास विवाह के खर्चे के लिए धन नहीं था।

पवित्र ऋण: भगवान विष्णु ने भगवान कुबेर से विवाह के लिए भारी मात्रा में धन उधार लिया। इस वादे के साथ कि वे कलियुग के अंत तक ब्याज समेत यह कर्ज चुकाएंगे। मान्यता है कि आज भी भक्त जो दान तिरुपति में करते हैं, वह इस ऋण का ब्याज चुकाने में भगवान की सहायता है।

रामायण से संबंध: माना जाता है कि भगवान राम वनवास के दौरान यहाँ आए थे। तिरुमला और तिरुपति के बीच का क्षेत्र उस समय दंडकारण्य वन का हिस्सा था।

महाभारत कालीन संदर्भ: कुछ मान्यताओं के अनुसार, पांडव भी अपने अज्ञातवास के दौरान यहाँ आए थे।

वराह पुराण की कथा: इस पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु ने वराह अवतार में पृथ्वी को उबारने के बाद यहाँ विश्राम किया था।

तिरुपति बालाजी मंदिर
तिरुपति बालाजी मंदिर

तिरुपति बालाजी मंदिर के अनसुने तथ्य

अधिकांश तथ्य केवल स्थानीय लोगों तक सीमित है, पर तिरुमला के कुछ रहस्य अभी भी बहुतों से छिपे हैं:

  1. मूर्ति का प्राकृतिक स्वरूप: गर्भगृह में स्थापित मुख्य वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति किसी मानव निर्मित शिल्प की नहीं, बल्कि एक स्वयंभू (स्वयं प्रकट) विग्रह मानी जाती है। यह मूर्ति पहाड़ी की प्राकृतिक चट्टान में से निकली हुई प्रतीत होती है और इस पर लगाए गए चंदन का पेस्ट सदियों से सीधे मूर्ति पर लगाया जाता रहा है, जिससे इसकी मूल आकृति भी कुछ परिवर्तित हुई है।
  2. दाहिनी ओर की छड़ी: मुख्य मंदिर के प्रवेश द्वार के दाईं ओर एक छड़ी रखी है। मान्यता है कि बचपन में श्रीनिवास की पिटाई इसी छड़ी से की गई थी, जिससे उनकी ठोड़ी (Chin) पर चोट लग गई थी। इसी कारण आज भी प्रतिमा की ठोड़ी पर चंदन का लेप लगाया जाता है।
  3. अखंड दीपक का रहस्य: गर्भगृह के भीतर एक अखंड ज्योति (निरंतर जलता हुआ दीपक) सदियों से जल रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस दीपक में तेल या घी की आपूर्ति किए बिना ही यह जलता रहता है, जो एक अद्भुत रहस्य है। पुजारियों का मानना है कि यह भगवान की दिव्य शक्ति का प्रतीक है।
  4. अचल प्रतिमा का रहस्य: गर्भ गृह के अंदर देखने पर भगवान की मूर्ति बीच में दिखाई देती है, लेकिन जैसे ही आप बाहर आते हैं, वह दाईं ओर झुकी हुई प्रतीत होती है। वैज्ञानिक आज तक इसका कारण नहीं बता पाए हैं।
  5. मूर्ती पर पसीना: मंदिर के अंदर तापमान काफी कम रखा जाता है, फिर भी भगवान की मूर्ति पर पसीने की बूंदें देखी जाती हैं। उनकी पीठ पर कान लगाने से समुद्र की लहरों की गूँज सुनाई देती है।
  6. वस्त्रों का तापमान रहस्य: भगवान वेंकटेश्वर को चढ़ाए जाने वाले वस्त्र (वस्त्रम्) और फूलों की मालाएँ हमेशा नमीयुक्त और ठंडे रहते हैं, भले ही बाहर का तापमान कितना भी अधिक क्यों न हो। यह घटना मूर्ति के आसपास के माइक्रोक्लाइमेट का एक अनसुलझा वैज्ञानिक पहलू है।
  7. कभी न सूखने वाला जल स्रोत: मंदिर परिसर में “आकाश गंगा” नामक एक जलधारा है। मान्यता है कि यह भगवान विष्णु के पैरों से निकली है। विज्ञान के अनुसार, यह एक प्राकृतिक झरना है जो पहाड़ी की गुफाओं से निकलता है और कभी नहीं सूखता, यहाँ तक कि सूखे के मौसम में भी।
  8. बालों का वैश्विक व्यापार: भक्तों द्वारा चढ़ाए गए बाल (मुंडन) को एक अनूठा अनुष्ठान माना जाता है। कम लोग जानते हैं कि यहाँ प्रतिदिन औसतन एक टन बाल एकत्र होते हैं, जिन्हें ट्रस्ट द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचा जाता है। इससे प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की आय होती है, जो मंदिर के चैरिटेबल कार्यों में खर्च की जाती है।
  9. उल्टी दिशा में बहता धुएँ का गुबार: मुख्य हवन कुंड में आहुति देते समय निकलने वाला धुआँ हवा की दिशा के विपरीत बहता हुआ दिखाई देता है, जो सामान्य प्राकृतिक नियमों के विपरीत है।

तिरुपति बालाजी मंदिर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तिरुपति बालाजी मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है, हालाँकि इसका लिखित प्रमाण 9वीं शताब्दी से मिलता है। संत अन्नमाचार्य (15वीं शताब्दी) ने अपने भजनों में इस मंदिर का विस्तृत वर्णन किया है, जो इसकी प्राचीनता को दर्शाता है।

  • प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख: मंदिर का जिक्र वाराह पुराण, पद्म पुराण और ब्रह्म पुराण जैसे ग्रंथों में मिलता है। इसे “कलियुग का वैकुंठ” कहा गया है। तमिल संत-कवियों (आलवारों) ने भी इस स्थान की महिमा गाई है।
  • शासकों का योगदान: समय के साथ, विभिन्न राजवंशों ने इस मंदिर के विकास में योगदान दिया।
    • पल्लव, चोल और पांड्य शासक (9वीं से 12वीं शताब्दी)।
    • विजयनगर साम्राज्य (14वीं-17वीं शताब्दी) ने सबसे अधिक योगदान दिया। राजा कृष्णदेव राय ने मंदिर के मुख्य गोपुरम और कई मंडपों का निर्माण करवाया।
    • बाद में मराठा शासकों, कोल्लूर के राजाओं और हैदराबाद के निजाम ने भी दान दिया।
  • आधुनिक प्रबंधन: 1933 में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की स्थापना हुई, जो अब मंदिर के सभी प्रशासनिक, धार्मिक और वित्तीय कार्यों का प्रबंधन करता है। TTD दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक ट्रस्टों में से एक है।

“तिरुमला के इतिहास में श्रद्धा और शासन, दोनों का अद्भुत सामंजस्य है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवित धरोहर है।” – डॉ. एस. जानकी, इतिहासकार।


वास्तुकला का विस्तृत विश्लेषण

तिरुपति बालाजी मंदिर द्रविड़ शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पहाड़ी की प्राकृतिक संरचना के साथ सहजता से घुल-मिल गया है।

  • मंदिर परिसर का लेआउट: मंदिर पूर्वाभिमुख है। यह एक विशाल परिसर है जिसमें कई प्रवेश द्वार (गोपुरम), मंडप और प्रांगण हैं। मुख्य प्रवेश महाद्वारम से होता है।
  • अन्नद निलयम विमानम: मुख्य गर्भगृह के ऊपर बना स्वर्ण कलश युक्त विमान (गुंबद) मंदिर की शान है। इस पर सोने की परत चढ़ी हुई है, जिससे इसे “स्वर्ण गुंबद” भी कहते हैं। इसका वास्तुशिल्प अद्भुत है।
  • गर्भगृह (सन्कु सनाधी): यह अपेक्षाकृत छोटा और अंधेरा है, जो भक्त का ध्यान सीधे दिव्य विग्रह पर केंद्रित करता है। यहाँ की ध्वनिकी इतनी विशेष है कि गर्भगृह के भीतर की गई प्रार्थना पूरे मंडप में गूंजती है।
  • मंडप:
    • रंग मंडपम: जहाँ भगवान के आभूषण और वस्त्र प्रदर्शित किए जाते हैं।
    • कल्याण मंडपम: भगवान के दैनिक कल्याणोत्सव (श्रृंगार) का स्थान।
    • मुख्य मंडपम (वाहन मंडप): यहाँ विभिन्न वाहनों (हंस, गरुड़ आदि) की मूर्तियाँ हैं।
  • निर्माण सामग्री: मुख्य संरचना ग्रेनाइट पत्थर से बनी है। बाद के जोड़े गए हिस्सों और शिखर पर सोने, चांदी और कांसे का भरपूर प्रयोग हुआ है।
  • जल निकासी प्रणाली: पहाड़ी पर होने के बावजूद, मंदिर में बारिश के पानी की निकासी के लिए सदियों पुरानी एक अभियांत्रिकी प्रणाली है, जो आज भी कारगर है।

अन्य प्रसिद्ध मंदिरों से तुलना:

विशेषतातिरुमला तिरुपति बालाजी मंदिरश्रीरंगम रंगनाथस्वामीबद्रीनाथ धाम
स्थापत्य शैलीद्रविड़ शैलीद्रविड़ शैली (विश्व का सबसे बड़ा कार्यशील मंदिर)उत्तर भारतीय शैली
विशेष आकर्षणस्वयंभू मूर्ति, स्वर्ण विमान7 परिक्रमा पथ, विशाल गोपुरमहिमालय की गोद में स्थिति
प्रमुख प्रसादतिरुपति लड्डूश्रीरंगम अद्भुत प्रसादबद्रीनाथ के पकवान


तिरुपति बालाजी मंदिर के धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव

तिरुपति बालाजी मंदिर का दैनिक कार्यक्रम अत्यंत सुव्यवस्थित और आकर्षक है। भगवान को राजा के रूप में पूजा जाता है, इसलिए सभी अनुष्ठान राजसी ठाठ-बाट के साथ किए जाते हैं।

  • प्रतिदिन के अनुष्ठान:
    • सुप्रभात सेवा (3:00 AM): मंदिर खुलना, मंगल आरती।
    • थोमला सेवा (4:00 AM): भगवान को जगाना।
    • अभिषेकम (5:30 AM): दूध, घी, मधु आदि से स्नान।
    • कोलुवु (6:30 AM): दर्पण दर्शन।
    • सहस्र दीप अलंकार सेवा (8:30 AM): हजारों दीपकों से श्रृंगार।
    • कल्याणोत्सवम (9:30 AM): देवी लक्ष्मी के साथ विवाहोत्सव।
    • दर्शन समय (लगभग 12:00 PM से रात 1:00 AM तक): सामान्य दर्शन।
    • एकांत सेवा (रात 1:00 AM): भगवान को विश्राम।
  • विशेष अनुष्ठान: अस्तमान सेवा, अर्जिता ब्रह्मोत्सवम, सहस्र कलशाभिषेकम
  • प्रमुख उत्सव:
    • ब्रह्मोत्सवम् (सितंबर/अक्टूबर): 9 दिन का सबसे बड़ा उत्सव। विभिन्न वाहनों पर भगवान की सवारी निकाली जाती है।
    • वसंतोत्सवम् (मार्च/अप्रैल): वसंत का उत्सव।
    • जन्माष्टमी और वैकुंठ एकादशी।
  • अनूठा प्रसाद – तिरुपति लड्डू: यह भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त दुनिया का एकमात्र प्रसाद है। इसकी गुप्त रेसिपी परिवार के कुछ विशेष आचार्यों के पास सुरक्षित है।

तिरुपति बालाजी मंदिर यात्रा गाइड और सुविधाएँ

पहुँच मार्ग:

  • निकटतम हवाई अड्डा: तिरुपति अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (TIR) – तिरुमला से लगभग 40 किमी
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: तिरुपति मुख्य रेलवे स्टेशन (TPTY) – तिरुमला से लगभग 26 किमी। कोटा, चेन्नई, बैंगलोर आदि से सीधी कनेक्टिविटी।
  • बस सेवा: तिरुपति और तिरुमला के बीच TTD की नियमित और विशेष बसें चलती हैं। APSRTC की बसें भी उपलब्ध हैं।

स्थानीय परिवहन:

  • तिरुपति से तिरुमला के लिए बस किराया: लगभग ₹30-50
  • तिरुमला पहाड़ी पर, मंदिर परिसर और विभिन्न आवासों के बीच निःशुल्क बस सेवा उपलब्ध है।
  • ऑटो-रिक्शा तिरुपति शहर में उपलब्ध।

सर्वोत्तम समय:

  • सबसे अच्छा मौसम: सितंबर से फरवरी (सर्दियाँ सुहावनी)।
  • भीड़ कम: जून-जुलाई (मानसून) में भीड़ थोड़ी कम रहती है, पर यात्रा में बाधा हो सकती है।
  • टालने योग्य समय: ब्रह्मोत्सव (सितंबर/अक्टूबर) और दिसंबर-जनवरी की छुट्टियों में भीड़ अत्यधिक होती है।

दर्शन समय और टिकट:

  • सामान्य दर्शन (Free): लंबी कतार, 4-8 घंटे का इंतजार।
  • शीघ्र दर्शन (₹300): कम समय, अलग लाइन।
  • श्रद्धा दर्शन (₹500): और अधिक तेज़।
  • स्पेशल एंट्री दर्शन (₹1000): सबसे कम प्रतीक्षा।
  • ऑनलाइन बुकिंग: TTD की आधिकारिक वेबसाइट से सभी टिकट और आवास पहले से बुक कर सकते हैं।

आवास (TTD गेस्ट हाउस):

  • बजट: अपर्णा, विश्रांति, वैष्णवी आदि। (₹200-₹500 प्रतिदिन)।
  • मध्यम: श्रीनिवास, पद्मावती, सप्तगिरी आदि। (₹800-₹2000 प्रतिदिन)।
  • लग्जरी: टीटीडी चैतन्य, विशेष आवास। (अधिक दान पर)।
  • बुकिंग: ऑनलाइन या तिरुपति/तिरुमला में काउंटर से।

सुविधाएँ:

  • निःशुल्क भोजन (अन्नदानम): हजारों भक्तों को प्रतिदिन।
  • क्लॉक रूम, पानी के कूलर, मेडिकल सहायता।
  • पैरों की धुलाई की व्यवस्था, शिशु देखभाल कक्ष।
  • TTD सूचना केंद्र हर जगह उपलब्ध।

फोटोग्राफी:

  • मुख्य गर्भगृह के अंदर फोटोग्राफी/मोबाइल सख्त मना है।
  • तिरुपति बालाजी मंदिर के बाहरी परिसर, गोपुरम, मंडपों की फोटो ले सकते हैं।
  • स्वर्ण गुंबद की फोटो लेने का सबसे अच्छा स्थान मुख्य प्रवेश द्वार से बाहर का विस्तृत क्षेत्र है।

पर्यटकों के लिए विशेष सुझाव

  • पहनावा: पारंपरिक वस्त्र (धोती/साड़ी/सलवार कुर्ता) सर्वोत्तम। छोटे कपड़े, टॉप्स, शॉर्ट्स न पहनें। पैदल चलने में आसानी के लिए चप्पल/सैंडल पहनें।
  • सामान: न्यूनतम सामान रखें। बैग क्लॉक रूम में जमा करा सकते हैं। अपना पहचान पत्र (आधार/पैन), ऑनलाइन बुकिंग स्लिप, पानी की बोतल और एक छोटा तौलिया जरूर रखें।
  • सावधानियाँ: भीड़ में चोरी से सावधान रहें। पहाड़ी पर चढ़ते-उतरते समय सावधानी बरतें।
  • आस-पास के आकर्षण:
    • शिलातोरनम: प्राकृतिक चट्टानी मेहराब।
    • चंद्रगिरि किला (तिरुपति के पास): ऐतिहासिक स्थल।
    • श्री कालहस्ती मंदिर (लगभग 40 किमी): प्रसिद्ध शिव मंदिर।
    • कानिपकम (लगभग 80 किमी): प्राचीन विष्णु मंदिर।
  • सुझावित समय: तिरुमला में कम से कम एक रात रुकने की योजना बनाएं ताकि शांति से दर्शन और आसपास के स्थान देख सकें।

तिरुपति बालाजी मंदिर के वैज्ञानिक और प्राकृतिक आश्चर्य

तिरुमला पहाड़ी पूर्वी घाट का हिस्सा है, जो आर्कियन चट्टानों से बनी है, जो दुनिया की सबसे पुरानी चट्टान प्रणालियों में से एक है।

  • वनस्पति और जीव: यह क्षेत्र दक्षिण डेक्कन पठार के शुष्क पर्णपाती वनों से आच्छादित है। यहाँ हिरण, लंगूर, जंगली सुअर और कई प्रकार के पक्षी देखे जा सकते हैं।
  • जल स्रोत: आकाश गंगा, पाप विनाशनम, कुमार धारा जैसे प्राकृतिक झरने पहाड़ी के ऊपर स्थित हैं। ये भूमिगत जलस्रोतों से आते हैं और मंदिर के लिए पवित्र जल का स्रोत हैं।
  • वायुमंडलीय दबाव: पहाड़ी की ऊँचाई के कारण यहाँ का वायुदाब और ऑक्सीजन का स्तर मैदानी इलाकों से कम है, जिससे कुछ लोगों को चक्कर या सांस लेने में हल्की तकलीफ हो सकती है।

सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव

तिरुमला मंदिर केवल एक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि एक विशाल सामाजिक-आर्थिक संस्थान है।

  • आर्थिक प्रभाव: तिरुपति-तिरुमला क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तीर्थयात्रा पर्यटन पर निर्भर है। हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है।
  • शैक्षणिक संस्थान: TTD चलाता है:
    • श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, तिरुपति।
    • श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय।
    • कई आवासीय स्कूल, कॉलेज और संस्कृत पाठशालाएँ।
  • चैरिटेबल कार्य:
    • अन्नदानम: दुनिया का सबसे बड़ा निःशुल्क भोजन कार्यक्रम।
    • श्री वेंकटेश्वर आयुर्वेद संस्थान (SAI): निःशुल्क आयुर्वेदिक चिकित्सा।
    • कल्याणमंडपम: सामूहिक विवाह कार्यक्रम।
    • वृद्धाश्रम और अनाथालय।
  • सांस्कृतिक संरक्षण: TTD शास्त्रीय संगीत और नृत्य के उत्सव आयोजित करता है, धार्मिक ग्रंथों का प्रकाशन करता है और पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहित करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. तिरुपति बालाजी मंदिर में स्ट्रिक्ट ड्रेस कोड क्या है?
A. पुरुषों के लिए धोती या पैंट-शर्ट, महिलाओं के लिए साड़ी/सलवार सूट। शॉर्ट्स, टॉप्स, टाइट कपड़े अनुमति नहीं।

Q2. ऑनलाइन दर्शन टिकट कैसे बुक करें?
A. TTD की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर, “Quick Ticket Booking” में जाएँ और चरण दर चरण पूरा करें।

Q3. तिरुपति लड्डू ऑनलाइन मंगवा सकते हैं क्या?
A. हाँ, TTD की “Sri Venkateswara Swamy Temple Laddu” वेबसाइट से आप लड्डू ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं और घर बैठे प्रसाद प्राप्त कर सकते हैं।

Q4. क्या मंदिर में रात भर रुक सकते हैं?
A. हाँ, TTD गेस्ट हाउस में रुक सकते हैं, बशर्ते आपने पहले से बुकिंग करवाई हो या वहाँ सीट उपलब्ध हो।

Q5. मुंडन (बाल दान) कहाँ और कैसे करवाएँ?
मुंडन के लिए अलग से दर्शन लाइन की व्यवस्था है।

Q7. क्या मोबाइल फोन मंदिर में ले जा सकते हैं?
A. हाँ, लेकिन गर्भगृह के अंदर मोबाइल का उपयोग सख्त मना है। बाहर इस्तेमाल कर सकते हैं।

Q8. गर्मी में दर्शन करने जा रहे हैं, क्या सावधानी बरतें?
A. पानी पीते रहें, सिर ढककर रखें, जूते आरामदायक पहनें और भीड़ में धैर्य बनाए रखें।


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