राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले में स्थित सांवरिया सेठ मंदिर, मंडफिया आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और भक्ति का ऐसा केंद्र बन चुका है, जहाँ हर दिन हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं के साथ पहुँचते हैं। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के श्याम स्वरूप को समर्पित है, जिन्हें भक्त प्रेम से “सांवरिया सेठ” कहते हैं।
देशभर में यह मंदिर इस विश्वास के लिए प्रसिद्ध है कि सांवरिया सेठ अपने भक्तों के रुके हुए काम बनाते हैं, व्यापार, नौकरी और जीवन की कठिनाइयों में सहारा बनते हैं। यही कारण है कि आज “सांवरिया सेठ मंदिर कहाँ स्थित है” और “सांवरिया सेठ मंदिर के चमत्कार क्या हैं” जैसे प्रश्न इंटरनेट पर सबसे अधिक खोजे जाते हैं।
सांवरिया सेठ मंदिर कहाँ स्थित है?
सांवरिया सेठ मंदिर मंडफिया राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले में स्थित है। यह मंदिर:
- चित्तौड़गढ़ से लगभग 40 किलोमीटर
- भीलवाड़ा से करीब 60 किलोमीटर
- उदयपुर से लगभग 70–75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
- जो लोग “सांवरिया सेठ मंदिर कैसे जाएँ” खोजते हैं, उनके लिए यह जानना उपयोगी है कि मंदिर सड़क मार्ग से राजस्थान के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
सांवरिया सेठ मंदिर का इतिहास
यदि बात करें सांवरिया सेठ मंदिर का इतिहास, तो यह कथा लोकमान्यताओं और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार, कई शताब्दी पहले एक ब्राह्मण को स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण ने दर्शन दिए और अपने विग्रह के स्थान का संकेत दिया।
जब बताए गए स्थान पर खुदाई करवाई गई, तो वहाँ से भगवान श्रीकृष्ण के तीन विग्रह प्राप्त हुए।
इनमें से:
- एक विग्रह मंडफिया में प्रतिष्ठित किया गया (जो आज सांवरिया सेठ मंदिर कहलाता है)
- दूसरा भादसोड़ा
- तीसरा चेनपुरिया में स्थापित किया गया
समय के साथ मंडफिया में स्थित विग्रह की ख्याति सबसे अधिक बढ़ी और यह स्थान सांवरिया सेठ मंदिर राजस्थान के नाम से विश्व प्रसिद्ध हो गया।
सांवरिया सेठ कौन हैं और उन्हें “सेठ” क्यों कहा जाता है?
अक्सर पूछा जाता है – सांवरिया सेठ कौन हैं?
सांवरिया सेठ भगवान श्रीकृष्ण का श्याम स्वरूप हैं। उन्हें सेठ इसलिए कहा जाता है क्योंकि भक्त उन्हें:
- अपने जीवन का संरक्षक
- कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाला
- सुख-दुख में साथ देने वाला सेठ मानते हैं
इसी भाव के कारण लोग कहते हैं—
“सांवरिया सेठ सबका हिसाब बराबर करते हैं।”
सांवरिया सेठ मंदिर के चमत्कार क्या हैं?
सांवरिया सेठ मंदिर के चमत्कार श्रद्धालुओं के अनुभवों से जुड़े हुए हैं। हालाँकि ये वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं, लेकिन आस्था की दृष्टि से बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं।
भक्तों के अनुसार:
- वर्षों से रुके कार्य अचानक पूरे होने लगते हैं
- घाटे में चल रहा व्यापार लाभ में बदल जाता है
- नौकरी, विवाह और संतान से जुड़ी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं
- मानसिक तनाव और भय में शांति मिलती है
सांवरिया सेठ मंदिर में मन्नत कैसे माँगे?
सांवरिया सेठ मंदिर, मंडफिया में मन्नत माँगने की परंपरा अत्यंत सरल है। यहाँ किसी विशेष विधि या पंडित के माध्यम की अनिवार्यता नहीं होती, बल्कि सच्चे मन और पूर्ण विश्वास को ही सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है।
1. शुद्ध मन और सच्चे भाव से दर्शन करें
मंदिर में प्रवेश करते समय मन को शांत रखें। यह मान्यता है कि सांवरिया सेठ भाव के भूखे हैं, इसलिए दिखावे या शब्दों से अधिक भावना महत्त्वपूर्ण है।
2. गर्भगृह के सामने मौन भाव से प्रार्थना करें
भगवान सांवरिया सेठ के सामने:
- आँखें बंद करें
- मन ही मन अपनी समस्या या इच्छा रखें
- स्पष्ट रूप से कहें कि आपकी मन्नत क्या है
यहाँ ऊँची आवाज़ में कुछ बोलना आवश्यक नहीं होता।
3. मन्नत के साथ संकल्प लें
कई श्रद्धालु मन में यह संकल्प लेते हैं कि:
“हे सांवरिया सेठ, यदि मेरी यह मन्नत पूर्ण हुई, तो मैं भोग / नेवज / सेवा अर्पित करूँगा।”
यह संकल्प व्यक्तिगत होता है, इसमें कोई कठोर नियम नहीं है।
4. भोग या नेवज का भाव रखें
मन्नत माँगते समय भक्त यह भाव रखते हैं कि मन्नत पूर्ण होने पर:
- भोग लगाएँगे
- प्रसाद चढ़ाएँगे
- या यथाशक्ति दान करेंगे
इसी कारण “सांवरिया सेठ मंदिर में भोग क्यों चढ़ाया जाता है” यह भी एक आम प्रश्न है।
5. दान या चढ़ावा देना अनिवार्य नहीं
यह समझना बहुत ज़रूरी है कि:
- मन्नत माँगने के लिए दान अनिवार्य नहीं
- भगवान से लेन-देन का भाव नहीं, बल्कि विश्वास का रिश्ता होता है
दान आपकी श्रद्धा और सामर्थ्य पर निर्भर करता है।
6. मन्नत पूर्ण होने पर क्या करें?
जब आपकी मन्नत पूरी हो जाए, तो:
- पुनः मंदिर जाकर दर्शन करें
- तय किया हुआ भोग या नेवज अर्पित करें
- भगवान का धन्यवाद करें
कई भक्त मानते हैं कि धन्यवाद अर्पित करना भी भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
श्रद्धालुओं की मान्यता
भक्तों का विश्वास है कि:
- सांवरिया सेठ “तारीख नहीं बताते”, लेकिन काम ज़रूर बनाते हैं
- वे देर कर सकते हैं, पर अंधेर नहीं
इसलिए मन्नत माँगने के बाद धैर्य और विश्वास बनाए रखना आवश्यक माना जाता है।
संक्षेप में – सांवरिया सेठ मंदिर में मन्नत माँगने का सबसे बड़ा मंत्र है सच्चा मन, विनम्र भाव और अटूट विश्वास।
सांवरिया सेठ मंदिर में भोग क्यों चढ़ाया जाता है?
सांवरिया सेठ मंदिर, मंडफिया में भोग चढ़ाने की परंपरा केवल भोजन अर्पित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, कृतज्ञता और विश्वास की अभिव्यक्ति मानी जाती है। भक्त यहाँ भोग को भगवान के साथ लेन-देन नहीं, बल्कि भावनात्मक संबंध के रूप में देखते हैं।
1. मन्नत पूर्ण होने पर कृतज्ञता प्रकट करने के लिए
अधिकांश श्रद्धालु मानते हैं कि जब उनकी मन्नत पूरी होती है, तो भोग अर्पित करके वे:
- भगवान को धन्यवाद देते हैं
- अपनी आस्था को व्यक्त करते हैं
इसलिए लोग कहते हैं कि भोग माँगने का साधन नहीं, धन्यवाद का माध्यम है।
2. भगवान को “सेठ” मानकर भाव अर्पित करना
यहाँ श्रीकृष्ण को सांवरिया सेठ कहा जाता है।
सेठ का अर्थ होता है—पालनकर्ता और संरक्षक।
भक्त मानते हैं कि जैसे घर में कमाने वाले को पहले भोजन कराया जाता है, वैसे ही:
- जीवन का पालन करने वाले सांवरिया सेठ को भोग अर्पित किया जाता है।
3. अहंकार नहीं, समर्पण का प्रतीक
भोग चढ़ाने का अर्थ यह नहीं कि भगवान को भोजन चाहिए, बल्कि यह:
- अपने कर्मों का फल भगवान को समर्पित करना
- “जो मिला, वह आपकी कृपा से मिला”—इस भाव को प्रकट करना
इसीलिए यहाँ भोग दिखावे से नहीं, भावना से स्वीकार किया जाता है।
4. शास्त्रीय और भक्ति परंपरा से जुड़ा भाव
हिंदू परंपरा में कहा गया है कि भगवान को अर्पित किया गया अन्न:
- प्रसाद बनकर लौटता है
- जो भक्त के जीवन में शुभता और शांति लाता है
सांवरिया सेठ मंदिर में भोग इसी प्राचीन भक्ति परंपरा का हिस्सा है।
5. भोग की अधिकता को कृपा का संकेत माना जाता है
यह मंदिर विशेष रूप से इस कारण प्रसिद्ध है कि यहाँ:
- भोग और दान की मात्रा अत्यधिक होती है
- भक्त इसे भगवान की अपार कृपा का संकेत मानते हैं
यह कारण भी है कि लोग सांवरिया सेठ मंदिर में भोग चढ़ाते हैं।
सांवरिया सेठ मंदिर में भोग इसलिए चढ़ाया जाता है क्योंकि यह आभार, समर्पण और विश्वास का भावपूर्ण प्रतीक है। यह कोई लेन-देन नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच का आत्मिक रिश्ता है।
सांवरिया सेठ मंदिर की वास्तुकला
सांवरिया सेठ मंदिर की वास्तुकला सरल लेकिन भावपूर्ण है। यहाँ दिखावे से अधिक भक्ति का प्रभाव दिखाई देता है।
- गर्भगृह में विराजमान श्यामवर्ण श्रीकृष्ण
- सौम्य मुखमुद्रा और करुणामय दृष्टि
- श्रृंगार के समय विशेष वस्त्र और आभूषण
दर्शन के समय श्रद्धालु स्वतः ही भाव-विभोर हो जाते हैं।
सांवरिया सेठ मंदिर में भोग क्या लगता है?
“सांवरिया सेठ भोग” भक्तों के बीच विशेष श्रद्धा का विषय है।
यहाँ भगवान को:
- खिचड़ी
- दाल-बाटी
- चावल, सब्ज़ी
- मिठाइयाँ
अर्पित की जाती हैं।
कई बार भोग की मात्रा इतनी अधिक होती है कि श्रद्धालु इसे सांवरिया सेठ की कृपा का प्रतीक मानते हैं।
सांवरिया सेठ मंदिर दर्शन का समय
जो श्रद्धालु “सांवरिया सेठ मंदिर दर्शन समय” जानना चाहते हैं, उनके लिए सामान्य समय इस प्रकार है (पर्वों पर परिवर्तन संभव):
- प्रातः दर्शन: 5:30 बजे से 12:00 बजे तक
- सायंकाल दर्शन: 4:00 बजे से 8:30 बजे तक
शनिवार, रविवार और एकादशी को यहाँ विशेष भीड़ रहती है।
सांवरिया सेठ मंदिर कैसे जाएँ?
रेल मार्ग
निकटतम रेलवे स्टेशन: चित्तौड़गढ़ जंक्शन
यहाँ से बस और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं।
सड़क मार्ग
चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और उदयपुर से सीधी बस सुविधा है।
हवाई मार्ग
निकटतम हवाई अड्डा: उदयपुर (डबोक एयरपोर्ट)
सांवरिया सेठ मंदिर के प्रमुख त्यौहार
- जन्माष्टमी – सबसे बड़ा उत्सव
- फाल्गुन मेला
- एकादशी
- दीपावली और होली
इन अवसरों पर मंदिर परिसर भक्ति और उत्साह से भर जाता है।
सांवरिया सेठ मंदिर से जुड़े सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
सांवरिया सेठ मंदिर कहाँ स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले के मंडफिया कस्बे में स्थित है।
सांवरिया सेठ मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
यह मंदिर मन्नत पूर्ण होने, भोग परंपरा और भक्तों के अनुभवों के कारण प्रसिद्ध है।
सांवरिया सेठ मंदिर का इतिहास क्या है?
मंदिर का इतिहास प्राचीन काल में प्राप्त कृष्ण विग्रहों से जुड़ा हुआ है, जिनमें से एक मंडफिया में स्थापित हुआ।
सांवरिया सेठ मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
अक्टूबर से मार्च का समय मौसम और दर्शन दोनों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
क्या यहाँ मन्नत माँगने की परंपरा है?
हाँ, श्रद्धालु यहाँ मन्नत माँगते हैं और पूर्ण होने पर भोग व नेवज अर्पित करते हैं।
निष्कर्ष
सांवरिया सेठ मंदिर, मंडफिया आस्था, विश्वास और भक्ति का ऐसा केंद्र है, जहाँ हर भक्त अपने जीवन की किसी न किसी उम्मीद के साथ आता है।
यह मंदिर हमें यह सिखाता है कि सच्चे विश्वास के साथ किया गया स्मरण कभी व्यर्थ नहीं जाता।
यदि आप राजस्थान के प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों, धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक शांति की तलाश में हैं, तो सांवरिया सेठ मंदिर आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।



