राजस्थान की वीर भूमि बाड़मेर जिले में स्थित जसोल माता जी मंदिर, जिसे श्री रानी भटियाणी माता धाम और माजीसा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, उत्तर भारत के सबसे प्रभावशाली और चमत्कारी देवी धामों में गिना जाता है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि जन-जन की आस्था, विश्वास और अनुभवों से जुड़ा हुआ ऐसा केंद्र है जहाँ हर वर्ग, हर जाति और हर राज्य के श्रद्धालु माता के चरणों में शीश झुकाने आते हैं।
जसोल धाम की विशेषता यह है कि यहाँ माता को एक लोकदेवी के रूप में पूजा जाता है, जो अपने भक्तों की समस्याएँ सीधे सुनती हैं और बिना किसी भेदभाव के कृपा करती हैं। यही कारण है कि इस मंदिर की मान्यता राजस्थान तक सीमित न होकर गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक फैली हुई है।
कौन थीं माता राणी भटियाणी? (माजीसा का परिचय और इतिहास)
माता राणी भटियाणी का जन्म विक्रम संवत 1725 (सन् 1668) में जैसलमेर के जोगीदास गांव के एक राजपूत परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम ठाकुर जोगराज सिंह जी भाटी था। उनका नाम ‘स्वरुप कंवर’ था और वे जैसलमेर के भाटी राजवंश की राजकुमारी थीं, इसीलिए उन्हें ‘भटियाणी’ कहा जाता है। वे बचपन से ही दयालु, धर्मपरायण और अलौकिक गुणों से संपन्न थीं। उनके पिता ठाकुर जोगराज सिंह भाटी उन्हें साक्षात शक्ति का अंश मानते थे।
स्वरूप कंवर का विवाह जसोल के रावल कल्याण सिंह के साथ हुआ था। जसोल उस समय मालाणी रियासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। रावल कल्याण सिंह की पहली पत्नी रानी देवड़ी थीं। रानी देवड़ी के कोई पुत्र नहीं था। ऐसा कहा जाता है कि रावल कल्याण सिंह ने पुत्र प्राप्ति के लिए स्वरूप कंवर से दूसरा विवाह किया था।
रानी भटियाणी स्वभाव से बहुत दयालु और सुंदर थीं, जिसके कारण वे ठाकुर कल्याण सिंह की प्रिय रानी बन गईं। स्वरूप कंवर के रूप और गुणों ने उन्हें जसोल की जनता का प्रिय बना दिया, जिससे महल के भीतर ईर्ष्या और षडयंत्रों का जन्म हुआ।
सतीत्व से देवी बनने की अलौकिक कहानी
विवाह के दो वर्ष पश्चात माजीसा ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम कुंवर लाल सिंह था। जब रानी भटियाणी ने एक पुत्र को जन्म दिया, तो रानी देवड़ी के मन में अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा और जलन पैदा हो गई। ईर्ष्या की आग इतनी बढ़ गई कि रानी देवड़ी ने बालक लाल सिंह की हत्या की साजिश रची।
श्रावण मास की तीज के अवसर पर रानी भटियाणी अपनी सहेलियों के साथ बगीचे में झूला झूलने गई थीं। महल में कुंवर लाल सिंह अकेले सो रहे थे। मौका पाकर देवड़ी रानी ने लाल सिंह को दूध में विष (जहर) मिलाकर पिला दिया, जिससे उनकी तत्काल मृत्यु हो गई। जब रानी भटियाणी वापस लौटीं और अपने मृत पुत्र को देखा, तो वे इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाईं और पुत्र वियोग में उन्होंने भी अपने प्राण त्याग दिए। वह दिन वि. सं. 1775 माघ सुदी द्वितीया का था।
जसोल धाम के प्रमुख चमत्कार (माजीसा के पर्चे)
राजस्थानी लोक संस्कृति में दैवीय शक्ति के प्रमाण को ‘पर्चा’ कहा जाता है। माजीसा के ऐसे अनगिनत चमत्कार हैं जिन्होंने नास्तिकों को भी आस्तिक बना दिया:
- सवाई सिंह और ढोली की कथा: कहा जाता है कि माजीसा के परम भक्त सवाई सिंह और एक ढोली (गायक) को माता ने साक्षात दर्शन दिए थे। जैसलमेर से दो ढोली (शंकर और ताजिया) रानी से मिलने जसोल आए थे। उन्हें रानी की मृत्यु का पता नहीं था। जब वे महल पहुँचे, तो द्वेषवश देवड़ी रानी ने उन्हें श्मशान की ओर भेज दिया। वहां दुखी होकर जब उन्होंने अपनी “बाईसा” (रानी) को पुकारा, तो माता रानी भटियाणी ने साक्षात दर्शन दिए। जब ढोली ने भूखा होने की बात कही, तो माता ने उसे भोजन कराया और उसे सोने के कंगन भेंट किए। जब ढोली ने यह बात गांव वालों को बताई, तो किसी ने विश्वास नहीं किया, लेकिन बाद में साक्ष्यों ने सबको नतमस्तक कर दिया। आज भी मंदिर में ढोली समुदाय के लोग अपनी कला के माध्यम से माता का गुणगान करते हैं।
- रावल जी को पत्र: माजीसा ने उन ढोलियों को एक पत्र दिया और कहा कि इसे रावल कल्याणमल जी को दे देना। उस पत्र में लिखा था कि रावल जी की मृत्यु आज से ठीक 12वें दिन हो जाएगी। और ठीक वैसा ही हुआ, रावल कल्याणमल जी का स्वर्गवास 12वें दिन हो गया।
- बीमारियों का निवारण: मान्यता है कि माजीसा के मंदिर की रज (धूल) को माथे पर लगाने से असाध्य रोग ठीक हो जाते हैं। विशेषकर बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए माता का आशीर्वाद अचूक माना जाता है।
- मनोकामना पूर्ति: भक्त अपनी मुरादें लेकर यहाँ नारियल बांधते हैं और माजीसा उनकी झोली खुशियों से भर देती हैं। व्यापार में उन्नति हो या संतान प्राप्ति, माजीसा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। जब मनोकामना पूरी होती है, तब वे यहाँ ‘सवामणी’ का भोग चढ़ाते हैं।
माता के भक्तों का कहना है कि माता स्वप्न में दर्शन देकर उनकी समस्याओं का समाधान बताती हैं। कई श्रद्धालु बताते हैं कि माता ने उन्हें बीमारी, कोर्ट-कचहरी, संतान सुख, रोजगार और विवाह से जुड़ी समस्याओं में स्पष्ट मार्गदर्शन दिया।
माता के चमत्कारों के कारण ही जसोल धाम को कई लोग राजस्थान का जीवंत शक्तिपीठ भी कहते हैं।
मंदिर की वास्तुकला और दर्शन का महत्व
जसोल का यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक बल्कि स्थापत्य कला की दृष्टि से भी भव्य है। सफेद संगमरमर से निर्मित इस मंदिर की नक्काशी देखते ही बनती है। मंदिर के शिखर पर लहराती ध्वजा दूर-दूर से भक्तों को आकर्षित करती है।
- मुख्य गर्भगृह: यहाँ माजीसा की दिव्य प्रतिमा है, जो हमेशा पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा और स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित रहती है।
- अन्य मंदिर: परिसर में लाल सिंह जी (भंवर जी), खेतपाल जी (भैरव) और सवाई सिंह जी के मंदिर भी स्थित हैं। यहाँ के मुख्य प्रवेश द्वार को ‘सिंह द्वार’ कहा जाता है।
यहाँ की आरती का अनुभव अलौकिक होता है, जहाँ नगाड़ों की गूंज और भक्तों के ‘जय माजीसा री’ के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठता है।
जसोल माता जी मंदिर दर्शन समय
नीचे जसोल माता जी मंदिर के सामान्य दर्शन समय को तालिका के रूप में प्रस्तुत किया गया है
| पूजा एवं दर्शन | समय |
|---|---|
| मंदिर खुलने का समय | प्रातः 5:00 बजे |
| मंगला आरती | प्रातः 5:30 से 6:00 बजे |
| सामान्य दर्शन | प्रातः 6:00 से दोपहर 12:00 बजे |
| मंदिर विश्राम | दोपहर 12:00 से 2:00 बजे |
| पुनः दर्शन | दोपहर 2:00 से शाम 6:30 बजे |
| संध्या आरती | शाम 7:00 बजे |
| मंदिर बंद | रात 9:00 बजे |
विशेष पर्व और मेलों के समय दर्शन समय में परिवर्तन हो सकता है।
जसोल माता जी मंदिर कैसे पहुँचें
- जसोल माता जी मंदिर राजस्थान के बाड़मेर जिले में पचपदरा तहसील के अंतर्गत स्थित है।
- सड़क मार्ग से जसोल बालोतरा, बाड़मेर और जोधपुर से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। नियमित बसें और निजी वाहन उपलब्ध रहते हैं।
- रेल मार्ग से निकटतम रेलवे स्टेशन बालोतरा है, जो जसोल से लगभग 6-7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
- हवाई मार्ग से जोधपुर या उदयपुर एयरपोर्ट सबसे नज़दीकी प्रमुख हवाई अड्डे हैं, जहाँ से सड़क मार्ग द्वारा जसोल पहुँचा जा सकता है।
कुलदेवी नागणेच्या माता जी और माजीसा का संबंध
श्रद्धालुओं के बीच यह एक स्थापित परंपरा है कि नागणेच्या माता जी के दर्शन के बाद जसोल माता (रानी भटियाणी सा) के दर्शन किए जाते हैं।
इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण और धार्मिक मान्यताएँ हैं:
- नागणेच्या माता जी: ये राठौड़ राजवंश की कुलदेवी हैं। हिंदू धर्म और राजस्थानी परंपरा में किसी भी शुभ कार्य या यात्रा में सबसे पहले अपनी ‘कुलदेवी’ को प्रणाम करना अनिवार्य माना जाता है।
- जसोल माता: ये एक लोकदेवी (सती माता) हैं। कुलदेवी का स्थान सर्वोच्च होता है, इसलिए पहले नागणेची माता (नगाणा गाँव) के दर्शन किए जाते हैं, फिर वहां से जसोल जाकर माजी सा के दर्शन किए जाते हैं।
ये दोनों पवित्र स्थान बाड़मेर जिले के आसपास ही स्थित हैं, जिससे यात्रियों के लिए एक ‘धार्मिक सर्किट’ बन जाता है:
- नगाणा (Nagana): यहाँ नागणेच्या माता का मुख्य मंदिर है।
- जसोल (Jasol): यहाँ से नगाणा की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है। श्रद्धालु अक्सर नगाणा से अपनी यात्रा शुरू कर के जसोल पर समाप्त करते हैं।
भक्तों का मानना है कि नागणेच्या माता शक्ति का मूल स्वरूप हैं और रानी भटियाणी सा ममता और मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी हैं। इसलिए कुलदेवी से आशीर्वाद लेने के बाद “माजी सा” (जसोल माता) के दरबार में अर्जी लगाना यात्रा को पूर्ण माना जाता है।
जसोल माता जी मंदिर के पास रहने के स्थान
जसोल धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आसपास कई प्रकार की रहने की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
जसोल माता जी ट्रस्ट द्वारा संचालित धर्मशालाएँ सबसे प्रमुख विकल्प हैं, जहाँ सस्ते और सुरक्षित आवास की सुविधा मिलती है।
बालोतरा में निजी होटल, गेस्ट हाउस और लॉज उपलब्ध हैं, जो मध्यम बजट में ठहरने के लिए उपयुक्त हैं।
विशेष मेलों के समय अस्थायी आवास और सामुदायिक भंडारों की भी व्यवस्था की जाती है।
जसोल माता जी मंदिर के पास खाने की सुविधा
मंदिर परिसर और आसपास शुद्ध शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जाता है। मेलों और विशेष अवसरों पर भंडारे का आयोजन होता है। बालोतरा क्षेत्र में स्थानीय राजस्थानी भोजन के कई विकल्प मिल जाते हैं।
जसोल माता जी मंदिर के आसपास अन्य दर्शनीय स्थल और मंदिर
जसोल धाम आने वाले श्रद्धालु आसपास के कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन भी कर सकते हैं।
बालोतरा का खेतेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र का एक प्रमुख शिव धाम है।
पचपदरा झील ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है।
बाड़मेर शहर में किराडू मंदिर समूह प्राचीन स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है।
नाकोड़ा मंदिर जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ है और जसोल से अपेक्षाकृत निकट स्थित है।
माता रानी भटियाणी मंदिर जसोल: पता एवं संपर्क
पूरा पता:
रानी भटियानी मंदिर,
जसोल, पचपदरा तहसील,
जिला- बाड़मेर, राजस्थान – 344024
02988-294007, 02988-294077
जसोल माता जी मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी (FAQs)
- 1. जसोल माता का मेला कब भरता है?
- माजीसा का मुख्य मेला चैत्र और आश्विन नवरात्रि के दौरान भरता है। इसके अलावा भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (तेरस-चौदस) को विशेष उत्सव होता है।
- 2. जसोल पहुँचने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
- जसोल, बालोतरा शहर से मात्र 5 किलोमीटर दूर है। बालोतरा रेलवे स्टेशन देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा है। जोधपुर हवाई अड्डा यहाँ से लगभग 100 किमी दूर है।
- 3. मंदिर के दर्शन का समय क्या है?
- मंदिर सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। मंगला आरती और संध्या आरती का समय ऋतु के अनुसार बदलता रहता है।
निष्कर्ष
जसोल की माता राणी भटियाणी केवल एक कुलदेवी नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए करुणा और शक्ति का प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति का अस्तित्व कालजयी हो जाता है। यदि आप अपनी आत्मा को शांति और जीवन को नई दिशा देना चाहते हैं, तो एक बार ‘जसोल धाम‘ की यात्रा अवश्य करें। माजीसा की ममतामयी छाया में आपकी हर चिंता दूर हो जाएगी।



