सप्त पुरी मंदिर: सनातन धर्म में तीर्थ यात्रा का विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार, भारतवर्ष में सात ऐसे शहर हैं जिन्हें ‘सप्त पुरी’ कहा जाता है। इन शहरों के बारे में मान्यता है कि यहाँ श्रद्धापूर्वक दर्शन और स्नान करने से मनुष्य को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है और ‘मोक्ष’ की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में कहा गया है:
अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवन्तिका। पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिका॥
1. अयोध्या (Ayodhya) – श्री राम की जन्मभूमि
सरयू नदी के तट पर बसी अयोध्या सप्त पुरियों में प्रथम मानी जाती है। यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की जन्मस्थली है। भव्य ‘राम मंदिर’ के निर्माण के बाद यहाँ की दिव्यता और बढ़ गई है। यहाँ हनुमानगढ़ी और कनक भवन के दर्शन का विशेष महत्व है।
2. मथुरा (Mathura) – कृष्ण की नगरी
यमुना किनारे बसी मथुरा भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली है। यहाँ का ‘कृष्ण जन्मस्थान’ मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। मथुरा के कण-कण में कान्हा का वास माना जाता है। यहाँ की लट्ठमार होली और विश्राम घाट की आरती भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
3. माया (Haridwar) – गंगा का द्वार
हरिद्वार को ‘मायापुरी’ के नाम से भी जाना जाता है। यहीं से पतित पावनी गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदानों में प्रवेश करती है। हर की पैड़ी पर होने वाली शाम की गंगा आरती और ब्रह्मकुंड में स्नान करना हर हिंदू की इच्छा होती है।
4. काशी (Varanasi) – शिव की नगरी
दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक, काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी मानी जाती है। बाबा विश्वनाथ का यह धाम ज्ञान और आध्यात्म का केंद्र है। गंगा के घाट और यहाँ की संकरी गलियां भारत की प्राचीन संस्कृति का जीवंत प्रमाण हैं।
5. कांची (Kanchipuram) – शक्ति और ज्ञान का केंद्र
तमिलनाडु में स्थित कांचीपुरम को ‘मंदिरों का शहर’ कहा जाता है। यह सप्त पुरी में इकलौता शहर है जो दक्षिण भारत में है। यहाँ मां कामाक्षी देवी का शक्तिपीठ और भगवान शिव का एकाम्रेश्वर मंदिर मुख्य आकर्षण हैं। यह रेशमी साड़ियों के साथ-साथ अपनी अद्वितीय वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है।
6. अवंतिका (Ujjain) – महाकाल की नगरी
मध्य प्रदेश के शिप्रा नदी के तट पर स्थित उज्जैन को अवंतिका कहा जाता है। यहाँ भगवान शिव का दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग ‘महाकालेश्वर’ स्थित है। यहाँ होने वाली ‘भस्म आरती’ पूरी दुनिया में अद्वितीय है। राजा विक्रमादित्य के इतिहास से जुड़ी यह नगरी न्याय और धर्म का प्रतीक है।
7. द्वारावती (Dwarka) – कृष्ण की राजधानी
गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित द्वारका भगवान श्री कृष्ण की कर्मभूमि और उनकी राजधानी है। द्वारकाधीश मंदिर (जगत मंदिर) की भव्यता देखते ही बनती है। गोमती नदी के संगम पर स्थित यह नगरी न केवल सप्त पुरी बल्कि ‘चार धाम’ में से भी एक है।
निष्कर्ष
सप्त पुरी की यात्रा केवल एक धार्मिक पर्यटन नहीं, बल्कि अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक मार्ग है। यदि आप भी शांति और आध्यात्मिक चेतना की खोज में हैं, तो इन सात पुरियों के दर्शन एक बार अवश्य करें।



