सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। गुजरात के वेरावल बंदरगाह के निकट प्रभास पाटन में स्थित यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय इतिहास के उत्थान और पतन का मूक साक्षी भी है। सोमनाथ मंदिर की महिमा का वर्णन ऋग्वेद से लेकर शिव पुराण तक में मिलता है, जो इसे सनातन धर्म का एक अमूल्य रत्न बनाता है।
पौराणिक कथा और इतिहास (Mythology & History)
सोमनाथ का अर्थ है “चंद्रदेव के स्वामी”। पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रदेव (सोम) का विवाह राजा दक्ष की 27 पुत्रियों (नक्षत्रों) से हुआ था। रोहिणी के प्रति उनके विशेष प्रेम के कारण दक्ष ने उन्हें क्षय रोग का श्राप दे दिया। इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रदेव ने इसी स्थान पर भगवान शिव की घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर महादेव यहाँ ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हुए।
ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव
सोमनाथ मंदिर अपनी अटूट आस्था और असीमित वैभव के कारण कई बार विदेशी आक्रमणकारियों के निशाने पर रहा, लेकिन हर बार यह अपनी राख से फिर जी उठा।
- 1024 ईस्वी: महमूद गजनवी ने मंदिर पर आक्रमण किया और इसकी अपार संपत्ति लूटी।
- 1297 ईस्वी: अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने मंदिर को क्षतिग्रस्त किया।
- 1706 ईस्वी: मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को भारी नुकसान पहुँचाया।
- 1951 ईस्वी: भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प से आधुनिक मंदिर का पुनर्निर्माण पूर्ण हुआ और डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने यहाँ प्राण-प्रतिष्ठा की।
स्थापत्य कला (Architecture)
वर्तमान सोमनाथ मंदिर का निर्माण चालुक्य शैली (नगाड़ा शैली) में किया गया है। यह मंदिर समुद्र के किनारे अपनी भव्यता के साथ खड़ा है।
- बाण स्तंभ (Baan Stambh): मंदिर के प्रांगण में एक प्राचीन स्तंभ है जिस पर एक तीर (बाण) बना है। यह दर्शाता है कि उस दिशा में सोमनाथ और दक्षिण ध्रुव (Antarctica) के बीच भूमि का कोई भी टुकड़ा नहीं है।
- गर्भगृह: मुख्य मंदिर में विशाल ज्योतिर्लिंग स्थापित है। मंदिर के शिखर की ऊँचाई लगभग 155 फीट है।
- सभा मंडप और नृत्य मंडप: मंदिर की नक्काशी और पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियाँ भारतीय शिल्प कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
सोमनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व (Spiritual Significance)
स्कंद पुराण के अनुसार, सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं। इसे “पापमोचन तीर्थ” भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ की गई पूजा से लंबी बीमारी और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह स्थान त्रिवेणी संगम (कपिला, हिरण और सरस्वती नदियों का मिलन) के पास होने के कारण पितृ तर्पण के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
सोमनाथ मंदिर पूजा और दर्शन का समय (Pooja Timings & Rituals)
श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार सुबह से रात तक खुले रहते हैं:
| कार्यक्रम | समय |
| दर्शन का समय | सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक |
| प्रातः आरती | सुबह 7:00 बजे |
| मध्याह्न आरती | दोपहर 12:00 बजे |
| संध्या आरती | शाम 7:00 बजे |
| लाइट एंड साउंड शो | रात 8:00 बजे (मंदिर परिसर में) |
सोमनाथ मंदिर कैसे पहुँचें (How to Reach)
- सड़क मार्ग (Road): सोमनाथ गुजरात के प्रमुख शहरों जैसे राजकोट (200 किमी) और अहमदाबाद (400 किमी) से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
- रेल मार्ग (Rail): सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल (Veraval) है, जो मंदिर से मात्र 7 किमी दूर है।
- वायु मार्ग (Air): निकटतम हवाई अड्डा दीव (Diu) है (लगभग 85 किमी) और राजकोट हवाई अड्डा भी एक अच्छा विकल्प है।
आस-पास के दर्शनीय स्थल (Nearby Places)
- त्रिवेणी संगम: तीन पवित्र नदियों का मिलन स्थल।
- भालका तीर्थ: वह स्थान जहाँ भगवान कृष्ण को जरा नामक शिकारी का तीर लगा था और उन्होंने देह त्याग किया था।
- गीता मंदिर: भगवान कृष्ण को समर्पित एक सुंदर मंदिर।
- सोमनाथ समुद्र तट: शांत और सुंदर तट, जो शाम की सैर के लिए उत्तम है।
श्रद्धालुओं के लिए कुछ सुझाव (Pro-Tips)
- ड्रेस कोड: मंदिर में शालीन कपड़े पहनें। छोटे कपड़े या अशोभनीय वस्त्र पहनकर प्रवेश वर्जित हो सकता है।
- फोटोग्राफी: मंदिर के गर्भगृह के भीतर मोबाइल और कैमरा ले जाना सख्त मना है। क्लॉक रूम में सामान जमा करने की सुविधा उपलब्ध है।
- सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मार्च के बीच का मौसम यात्रा के लिए सुखद होता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय स्वाभिमान और पुनरुत्थान का प्रतीक है। समुद्र की लहरों की गूँज और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों के बीच यहाँ की ऊर्जा आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाती है। यदि आप शांति और आध्यात्मिक शक्ति की तलाश में हैं, तो जीवन में एक बार सोमनाथ मंदिर की यात्रा अवश्य करें।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. सोमनाथ मंदिर कहाँ स्थित है?
सोमनाथ मंदिर भारत के गुजरात राज्य के गिर सोमनाथ जिले के वेरावल (प्रभास पाटन) में स्थित है।
2. क्या सोमनाथ मंदिर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता है?
सामान्य दर्शन के लिए किसी अग्रिम पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है, लेकिन विशेष पूजा या आरती के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट से बुकिंग कर सकते हैं।
3. सोमनाथ मंदिर को कितनी बार तोड़ा गया था?
ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, सोमनाथ मंदिर को विभिन्न आक्रमणकारियों द्वारा लगभग 17 बार लूटा या नष्ट किया गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ।
4. सोमनाथ मंदिर का वर्तमान ढांचा किसने बनवाया?
आधुनिक सोमनाथ मंदिर का निर्माण भारत की स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में शुरू हुआ और 1951 में पूर्ण हुआ।
5. सोमनाथ में रुकने के लिए क्या व्यवस्था है?
सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा संचालित कई गेस्ट हाउस और ‘सागर दर्शन’ जैसे होटल उचित दरों पर उपलब्ध हैं।



