त्र्यंबकेश्वर मंदिर ज्योतिर्लिंग (Trimbakeshwar Temple Jyotirlinga) न केवल भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, बल्कि यह वह पवित्र स्थान है जहाँ साक्षात् त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक साथ विराजमान हैं। महाराष्ट्र के नासिक जिले में ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित यह मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। यहाँ की यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने वाला एक अलौकिक अनुभव है। गोदावरी नदी के उद्गम स्थल पर स्थित यह मंदिर अपनी प्राचीनता और रहस्यों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
पौराणिक कथा और इतिहास (Mythology & History)
त्र्यंबकेश्वर मंदिर का इतिहास जितना प्राचीन है, इसकी पौराणिक कथा उतनी ही भावुक करने वाली है। शिव पुराण के अनुसार, ऋषि गौतम और उनकी पत्नी माता अहिल्या यहाँ निवास करते थे।
मंदिर की उत्पत्ति की कथा:
ऋषि गौतम पर जब अनजाने में एक गाय की हत्या का पाप लगा, तो उन्होंने भगवान शिव की घोर तपस्या की। शिव जी प्रसन्न हुए और उन्होंने गंगा माता को पृथ्वी पर आने का आदेश दिया। गंगा यहाँ ‘गोदावरी’ के रूप में प्रकट हुईं और गौतम ऋषि के पापों का नाश किया। इसके बाद देवताओं के अनुरोध पर महादेव ने यहीं ज्योतिर्लिंग के रूप में वास करने का निर्णय लिया।
ऐतिहासिक तथ्य और चमत्कार:
- निर्माण: वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण तीसरे पेशवा नानासाहेब ने 1755 से 1786 के बीच करवाया था।
- लागत: उस समय इस मंदिर के निर्माण में लगभग 16 लाख रुपये खर्च हुए थे।
- चमत्कार: यहाँ के मुख्य लिंग में तीन छोटे अंगूठे के समान लिंग हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव के प्रतीक हैं। आश्चर्य की बात यह है कि यह लिंग धीरे-धीरे क्षय (Erode) हो रहा है, जिसे कई लोग कलयुग के अंत का संकेत मानते हैं।
- नागफनी हीरा: मराठा काल में इस मंदिर में एक बहुमूल्य ‘नागफनी’ हीरा लगा था, जो अब मैसूर के संग्रहालय या अन्य सुरक्षित स्थानों पर होने की चर्चा में रहता है।

स्थापत्य कला (Architecture)
त्र्यंबकेश्वर मंदिर नागर शैली (Nagara Style) की वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- काला पत्थर: मंदिर का निर्माण पूरी तरह से ‘बेसाल्ट’ यानी काले पत्थरों से हुआ है, जो इसे एक राजसी और गंभीर रूप देता है।
- नक्काशी: मंदिर के बाहरी हिस्से पर देवी-देवताओं, यक्षों और पौराणिक जानवरों की सुंदर आकृतियां उकेरी गई हैं।
- कुशवर्त कुंड: मंदिर के पास ही पवित्र कुशवर्त कुंड है, जहाँ भक्त स्नान करते हैं। यह माना जाता है कि गोदावरी यहीं से लुप्त होकर पुनः प्रकट होती है।
धार्मिक महत्व (Spiritual Significance)
इस मंदिर को ‘मोक्ष का द्वार’ माना जाता है। यहाँ दर्शन मात्र से व्यक्ति के संचित पापों का नाश होता है।
- कालसर्प दोष निवारण: पूरे भारत में त्र्यंबकेश्वर को कालसर्प और पितृ दोष शांति के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
- नारायण नागबली: पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहाँ विशेष ‘नारायण नागबली’ पूजा की जाती है।
त्र्यंबकेश्वर मंदिरपूजा और दर्शन का समय (Pooja Timings & Rituals)
भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर का समय इस प्रकार है:
| अनुष्ठान | समय |
| मंदिर खुलना और काकड़ आरती | सुबह 5:30 बजे |
| सामान्य दर्शन | सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक |
| मध्याह्न पूजा | दोपहर 1:00 बजे से 1:30 बजे तक |
| शयन आरती | रात 9:00 बजे |
विशेष नोट: सोमवार के दिन पालकी यात्रा निकाली जाती है, जो अत्यंत दर्शनीय होती है।
त्र्यंबकेश्वर मंदिर कैसे पहुँचें (Travel Guide)
- सड़क मार्ग (Road): नासिक शहर से त्र्यंबकेश्वर की दूरी लगभग 28 किमी है। आप टैक्सी, ऑटो या राज्य परिवहन (MSRTC) की बसों से आसानी से पहुँच सकते हैं।
- रेल मार्ग (Rail): निकटतम रेलवे स्टेशन नासिक रोड (Nashik Road) है। यहाँ से आप प्राइवेट कैब लेकर 1 घंटे में मंदिर पहुँच सकते हैं।
- हवाई मार्ग (Air): निकटतम हवाई अड्डा ओझर (नासिक) है, लेकिन बेहतर कनेक्टिविटी के लिए मुंबई (छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट) सबसे अच्छा विकल्प है।
आस-पास के दर्शनीय स्थल
- ब्रह्मगिरि पर्वत: जहाँ से गोदावरी नदी निकलती है। यहाँ ट्रेकिंग का आनंद लिया जा सकता है।
- अंजनेरी पर्वत: इसे भगवान हनुमान का जन्मस्थान माना जाता है।
- पंचवटी: नासिक स्थित वह स्थान जहाँ श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान रहे थे।
- गंगाद्वार: गोदावरी के उद्गम का मुख्य स्थल, जो पहाड़ी की चोटी पर है।
भक्तों के लिए प्रो-टिप्स (Pro-Tips)
- ड्रेस कोड: सामान्य दर्शन के लिए शालीन कपड़े पहनें। यदि आप अभिषेक या विशेष पूजा करवा रहे हैं, तो पुरुषों के लिए ‘सोवळे’ (सिल्क धोती) अनिवार्य है।
- फोटोग्राफी: मंदिर के गर्भगृह के अंदर फोटोग्राफी सख्त मना है।
- सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मार्च के बीच मौसम सुहावना रहता है। महाशिवरात्रि के दौरान यहाँ भारी भीड़ होती है।
त्र्यंबकेश्वर मंदिर में ठहरने की जगह और यात्रा पैकेज
त्र्यंबकेश्वर में रुकने के लिए महेश्वरी धर्मशाला और गजानन महाराज संस्थान की धर्मशालाएं बेहतरीन विकल्प हैं। निजी होटलों में ‘होटल संस्कृत’ और ‘होटल ईशा’ प्रसिद्ध हैं।
पैकेज: यदि आप 2-3 दिन का समय लेकर आते हैं, तो आप ‘नासिक-त्र्यंबकेश्वर-शिर्डी’ सर्किट का पैकेज ले सकते हैं, जो धार्मिक दृष्टि से पूर्ण माना जाता है।
निष्कर्ष
त्र्यंबकेश्वर मंदिर ज्योतिर्लिंग की यात्रा केवल पत्थरों की नक्काशी देखना नहीं, बल्कि महादेव के उस विराट स्वरूप का अनुभव करना है जहाँ सृष्टि के निर्माणकर्ता, पालनकर्ता और संहारक एक साथ वास करते हैं। यदि आप शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की तलाश में हैं, तो एक बार त्र्यंबकेश्वर के चरणों में शीश ज़रूर झुकाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग कहाँ स्थित है?
यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में त्र्यंबक नामक कस्बे में स्थित है।
Q2. क्या दर्शन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है?
नहीं, लेकिन VIP दर्शन और विशेष पूजा के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट से अग्रिम बुकिंग कर सकते हैं।
Q3. कालसर्प दोष पूजा के लिए कितने दिन चाहिए?
आमतौर पर यह पूजा एक दिन में संपन्न हो जाती है, लेकिन आपको एक दिन पहले मंदिर पहुँचना चाहिए।
Q4. त्र्यंबकेश्वर मंदिर किसने बनवाया था?
वर्तमान मंदिर का निर्माण तीसरे पेशवा बालाजी बाजीराव (नानासाहेब) ने करवाया था।
Q5. गोदावरी नदी का उद्गम कहाँ है?
गोदावरी का उद्गम मंदिर के पीछे स्थित ब्रह्मगिरि पर्वत की पहाड़ियों से होता है।



